मल्टीनेशनल फूड कंपनी नेस्ले इंडिया की मुश्किलें एकबार फिर बढ़ने वाली है। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया है कि उसकी मैगी में लेड की मात्रा है। कंपनी की तरफ से गलती स्वीकार करने के बाद मुमकिन है कि यह मामला और आगे जायेगा।

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स्वास्थ्य सुरक्षा के पैमाने पर खरा नहीं उतरने की वजह से 2015 में 550 टन मैगी नष्ट कर दिया गया था। सरकार ने इस मामले में 650 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है।

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कंपनी ने स्‍वीकार किया कि लेड था मैगी में

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कंपनी के वकील से पूछा, उन्हें लेड की मौजूदगी वाला नूडल्स क्यों खाना चाहिए। शुरू में जब इस मामले का खुलासा हुआ था तब कंपनी ने दलील दी थी कि मैगी में लेड परमीसिबल सीमा में थी। हालांकि अब कंपनी यह मान रही है कि मैगी में लेड था।

वहीं न्‍यायमूर्त‍ि धनंजय वाइर् चंद्रचूड़ की अध्‍यक्षता में कहा कि इस मामले में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार होगी।

इसी संस्थान में मैगी के नमूनों की जांच की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में चल रहे इस मामले में कार्यवाही पर तब रोक लगा दी थी जब नेस्ले ने इसे चुनौती दी थी।

 

मैगी में पायी गयी थी 17.2 लेड की मात्रा

इस बात से अवगत करा दें क‍ि 2015 में मैगी में लेड की मात्रा 17.2 पीपीएम पाई गई जबकि यह 0.01 से 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए। वहीं उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने मैगी के सैंपल लिए और इसकी जांच कराई तो मैगी में लेड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली। 

कई द‍िनों तक मैगी की बिक्री पर रोक लगी

इस मामले के बाद देश के कई राज्यों ने अपने यहां पर मैगी की ब्रिकी रोक दी। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भी मैगी के सभी वर्जंस को असुरक्षित बताते हुए कंपनी को इसके प्रॉडक्‍शन एवं बिक्री पर रोक लगा दी।

एफएसएसएआई ने उस समय कहा था कि नेस्‍ले ने अपने उत्‍पाद पर मंजूरी लिए बिना और जोखिम-सुरक्षा आंकलन को मैगी ओट्स मसाला नूडल्‍स मार्केट में उतार दिया था जो कि कानूनी रूप से पूरी तरह अवैध है।