आम लोगों को सुनकर अच्छा नहीं लगेगा कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने ग्राहकों को प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर 1 रुपए की राहत बंद कर दी है। रिर्पोट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बाद तेल कंपनियों ने मार्केटिंग मार्जिन में की गई कटौती को बंद कर दिया है।
पिछले साल अक्टूबर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अत्याधिक वृद्धि के बाद केंद्र सरकार ने ग्राहकों को अक्टूबर में पेट्रोल-डीजल पर 2.50 रुपए प्रति लीटर छूट की घोषणा की थी। सरकार ने प्रति लीटर 1.50 रुपए एक्साइज ड्यूटी कम की थी तो तेल कंपनियों से कहा था कि मार्केटिंग मार्जिन को कम करने उपभोक्ताओं को प्रति लीटर 1 रुपए की राहत दी जाए।
रिर्पोट के अनुसार हाल के दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट आने से कंपनियों की मार्जिन को पुराने स्तर पर रखने की गुंजाइश मिल गई है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद मार्जिन में कमी को रिकवर किया जा सकता है। अब तेल की कीमतें कम हो गई हैं और कंपनियां क्षतिपूर्ति कर सकती हैं।
इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में कमी का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देंगी अब वे मार्जिन में कमी की वजह से हुए घाटे को पूरा करेंगी। इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिख रहा है। 1 अक्टूबर से अब तक ब्रेंट क्रूड, सिंगापुर गैसोलाइन और अबर गल्फ डीजल की कीमतों में 37-40 की कमी आयी है लेकिन पेट्रोल और डीजल 17-18 प्रतिशत सस्ता हुआ है।
इस पर सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल पर दी गई एक रुपए प्रति लीटर की राहत से हुए नुकसान की भरपाई करने का उनका कोई इरादा नहीं है। इंडियन ऑयल समेत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉपोरेशन को 1 रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी देने से करीब 4,500 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
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