यहा पर निवेशकों के लिए एक अच्‍छी खबर है जी हां यदि आपने अब तक अपने शेयर डीमैट में नहीं बदले हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। सेबी ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों को डीमैट में बदलने की समय सीमा बढ़ा दी है। अब आप 1 अप्रैल तक इन शेयरों को डीमैट में बदल सकते हैं।

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5 दिसंबर थी आखिरी तारीख

आपको बता दें कि अब तक इन शेयरों को डीमैट में बदलने की समय सीमा 5 दिसंबर थी। मार्च में सेबी ने कहा था कि सिक्‍योरिटी के ट्रांसफर के आवेदन को तब तक प्रोसेस नहीं किया जाएगा, जब तक वे डिपॉजिटरी के पास डीमैट फॉर्म में नहीं बदल दिए जाते हैं। कई शेयरधारकों ने सेबी से इस समयसीमा को बढ़ाने की गुजारिश की थी सेबी ने सोमवार को कहा कि शेयरों को डीमैट में बदलने की समय सीमा बढ़ा दी है।

अभी तक कितने बदले गए शेयर

BSE की वेबसाइट पर उपलब्‍ध आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर 2018 तक सेंसेक्‍स की 30 कंपनियों के कुल शेयरों में करीब 4 प्रतिशत शेयर अब भी फिजिकल फॉर्म में हैं। ये गिनती में 400 करोड़ से अधिक शेयर हैं। ये नॉन-डीमैट फॉर्म या फिजिकल फॉर्म में हैं। 30 शेयरों वाले सूचकांक में इस तरह की अब तक ऐसी एक भी कंपनी नहीं है जिसके सभी शेयर डीमैट फॉर्म में बदले जा चुके हैं।

सेबी के मुताबिक खरीदार और विक्रेता फिजिकल फॉर्म में शेयरों की खरीद-फरोख्‍त नहीं कर सकते हैं। इस तरह 1 अप्रैल के बाद फिजिकल फॉर्म में रखे गए शेयर 'इललिक्विड' हो जाएंगे।

 

ऐसे बदल सकते हैं शेयरों को डीमैट में

शेयर को डीमैट में बदलने के लिए सबसे पहले तो आपके पास डीमैट खाता होना चाहिए। अब यदि आपने शेयरों को संयुक्‍त रुप से रखा है तो डीमैट खाते को सभी होल्‍डरों के नाम से खुलवाना होगा। डीमैट खाते में होल्डिंग का क्रम वैसा ही होना चाहिए जैसा शेयरों में है। डीमैट खाता खोलने के लिए सभी होल्‍डरों का केवाईसी होगा। इसमें उनका संपर्क, पते, ईमेल, बैंक अकाउंट का ब्‍योरा लिया जाएगा।

किसी अन्‍य वित्‍तीय सेवा की तरह डीपी के साथ खाता खुलवाने में फीस और ट्रांजेक्‍शन चार्ज की खास भूमिका होती है। खाता खुलवाने की फीस के अलावा एनुअल मेंटिनेंस फीस, ट्रांजेक्‍शन का भी महत्‍व है।

 

खाता खुलवाने की प्रक्रिया

खाता खुलवाने के अलावा कई आवेदन फॉर्म भरने पड़ते हैं। साथ ही पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) सहित एग्रीमेंट पेपर पर हस्‍ताक्षर करने होते हैं। पीओए में बैंक और डीमैट का ब्‍यौरा होता है इसे कर्मचारी नहीं, बल्कि ब्रोकर के नाम किया जाता है। सेक्‍योरिटी के ट्रांसफर के लिए इसकी जरुरत पड़ती है।