ईपीएफ खाता धारकों के लिए खुशखबरी है, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समूह ने शेयरों में 5 से 10 साल की लंबी अवधि के लिए निवेश का सुझाव दिया है। एक रिर्पोट ने बताया कि समिति का मानना है कि इससे ईपीएफओ के 6 करोड़ अंशधारकों को बेहतर रिटर्न मिल सकेगा। बता दें कि ईपीएफओ द्वारा गठित समिति की रिर्पोट उसके सलाहकार निकाय वित्त एवं निवेश समिति के एजेंडा में थी। यह बैठक 19 सितंबर को हुई थी।
रिर्पोट के अनुसार ईपीएफओ की अगली बैठक को टाल दिया गया है जो कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में हो सकती है। साथ ही समिति ने यह सुझाव दिया है कि ईपीएफओ को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में 5 से 10 साल की अवधि के लिए निवेश करना चाहिए, जिससे बेहतर रिटर्न मिल सके। इस 5 सदस्यीय समिति के प्रमुख ईपीएफओ के वित्तीय सलाहकार और मुख्य लेखा अधिकारी हैं। साथ ही समिति के सदस्यों में HDFC म्यूचुअल फंड के सीईओ भी हैं।
बता दें कि EPFO ने फरवरी में ईटीएफ में अपने निवेश के एक हिस्से को बेच दिया था ताकि 2017-18 के लिए अंशधारकों को उंचा ब्याज दिया जा सके। फिलहाल, बाद में ईपीएफओ ने बीते वित्त वर्ष के लिए ब्याज को घटाकर 8.55 प्रतिशत करने का फैसला किया, जो 2016-17 में 8.65 प्रतिशत था।
ईटीएफ की बिक्री के बाद ईपीएफओ ने लगभग 16 प्रतिशत का रिटर्न अर्जित किया जो तकरीबन 1,054 करोड़ रुपए था। वर्तमान में ईटीएफ में ईपीएफओ का निवेश 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। आपको बता दें कि ईपीएफओ अगस्त 2015 से ईटीएफ में निवेश कर रहा है।
इसके अलावा EPFO एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है जिसके जरिए EPF खाताधारकों के खाते में ETF की कमाई सीधे तौर पर आ जाएगी। इसके बाद कर्मचारियों के ईपीएफओ खाते में दो चीजें होंगी, नकद और ईटीएफ। निकासी के समय कर्मचारियों को अपने खाते से ईटीएफ के पैसे निकालने का विकल्प मिलेगा। फिलहाल ईटीएफ के पैसे कर्मचारियों को देने के लिए ईपीएफओ उसे बाजार में बेचेगी।
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