केंद्रीय मंत्र‍िमंडल ने चीनी उद्योग के ल‍िए 4500 करोड़ रुपये के पैकेज की मंजूरी दी है। सूत्रों के मुताबिक 2018-2019 में गन्‍ना उत्‍पादन को दोगुना कराना और चीनी म‍िलों को 50 लाख टन चीनी एक्‍सपोर्ट करने पर ट्रांसपोर्ट सबस‍िडी मुहैया कराना है। फूड मिनिस्ट्री ने मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति के सामने ये प्रपोजल रखा था कि चीनी का निर्यात रोकने और मिलों से किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है। बता दें कि मौजूदा वक्त में चीनी मिलों पर किसानों का 13,000 करोड़ रुपया बकाया है।

Advertisement

वहीं चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए ये दूसरा सरकारी वित्तीय पैकेज है। हांलाकि इससे पहले जून में सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। जबकि 2017-18 में 3.2 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से उद्योग के समक्ष चीनी के अधिक भंडार की समस्या हो गई है। इस माह के अंत तक चीनी का स्टॉक एक करोड़ टन था।

Advertisement

देश में अत्यधिक चीनी उत्पादन की स्थिति से निपटने की नीति के तहत मंत्रालय ने गन्ने के उत्पादन की लागत के असर को कम करने के लिए उत्पादकों को 2018-19 के विपणन वर्ष के लिए दी जाने वाली उतपादन सहायता बढ़ाकर 13.88 रुपये प्रति क्विंटल करने का प्रस्ताव किया था। इससाल के लिए ये 5.50 रुपये प्रति क्निंटल है।

दूसरी ओर वैश्विक बाजार में इस समय चीनी की कीमतें कम चल रहीं हैं। इसकी वजह से मंत्रालय ने मिलों को 2018-19 के लिए न्यूनतम सांकेतिक निर्यात कोटा के तहत 50 लाख टन चीनी निर्यात में मदद का प्रस्ताव किया है। इसपर चीनी मिलों को ट्रांसपोर्ट सबसिडी दी जाएगी।

Advertisement

हांलाकि सूत्रों का कहना हैं कि मंत्रालय ने बंदरगाह से 100 किलोमीटर में स्थित मिलों को 1,000 रुपये प्रति टन की सब्सिडी, जबकि तटीय राज्यों में बंदरगाह से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित मिलों के लिए 2,500 रुपये प्रति टन और तटीय राज्यों के अलावा स्थित मिलों के लिए 3,000 रुपये प्रति टन की परिवहन सब्सिडी का प्रस्ताव किया है। सरकार मिलों की तरफ से गन्ना उत्पादन सहायता किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित करेगी। ये कदम मिलों पर किसानों के बकाया 13,500 करोड़ रुपये के निपटान में मदद के लिए उठाया जा रहा है।