पेट्रोल- डीजल की बढ़ती कीमतों का असर उसके खपत पर भी दिखने लगा है। पिछले साढ़े तीन माह में पेट्रोल और डीजल के मूल्य में औसतन पौने तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। बता दें कि इसके चलते पेट्रोल और डीजल सहित सभी पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में भारी कमी आई है। वहीं एलपीजी की खपत भी कम हुई है।
बता दें कि पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन माह में पेट्रोल की खपत में 1.43 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। इसी तरह डीजल की खपत भी एक मई से 31 जुलाई तक 1.40 लाख मीट्रिक टन कम हुई है। जबकि दूसरे पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में भी कमी आई है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक, मई के माह में पूरे देश में 2457 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल की खपत हुई थी।
वहीं जबकि जून में यह खपत घटकर 2378 हजार मीट्रिक टन और जुलाई में पेट्रोल की खपत 2314 हजार मीट्रिक टन रह गई। इसी तरह डीजल की खपत भी मई में 7550 हजार मीट्रिक टन थी। जबकि जून में 7326 हजार मीट्रिक टन और जुलाई में 6610 हजार मीट्रिक टन रह गई। हालांकि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स के आंकड़े बताते हैं कि वाहनों की खरीद 16 फीसदी बढ़ी है।
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल का कहना है कि ईंधन की खपत पर महंगाई की भी मार पड़ी है। मंहगाई के चलते लोगों की आवाजाही में कमी आई है। इससे पेट्रोल-डीजल की खपत घट गई। बावजूद इसके ईंधन की खपत में कमी की बड़ी वजह कीमतों में वृद्धि है। पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी के दाम घटे हैं और कारोबार भी कम हुआ है, जिससे माल ढुलाई में कमी आई है।
बता दें कि पेट्रोल की खपत में वर्ष 2017-18 में 10 फीसदी की वृद्धि हुई थी। जबकि डीजल की खपत 6.6 प्रतिशत बढ़ी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो सीएनजी की खपत भी बड़ी है। यह भी पेट्रोल की मांग कम होने की बड़ी वजह है। हालांकि आने वाले दिनों में पेट्रोलियम की मांग बढ़ेगी।
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