भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने पुणे मुख्यालय वाले कॉस्मोस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में हुई साइबर लूट के लिए बुधवार को खुद बैंक के आईटी इकोसिस्टम को जिम्मेदार ठहराया। बता दें कि इस साइबर हमले में बैंक को 94.42 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया। इससे एनपीसीआई के जोखिम प्रबंधन प्रमुख भरत पंचाल ने कहा, 'एनपीसीआई का सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और यह समस्या बैंक कॉस्मोस बैंक के अपने आईटी परिवेश को लेकर पैदा हुई है।

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इस बात से भी अवगत कराया कि यह समस्या बैंक के आईटी सिस्टम पर मालवेयर हमले के कारण पैदा हुई, जिसके चलते धोखाधड़ी हुई। वहीं हमले के तहत अधिकतम लेन-देन की रिपोर्ट विदेशों से मिली। बता दें कि एनसीपीआई एक अंब्रेला संगठन है, जो भारत में खुदरा भुगतान और समाधान की व्यवस्था का संचालन करता है। संगठन की व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और संगठन कॉस्मोस बैंक की घटना से पैदा हुई स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है।

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जबकि कॉस्मोस बैंक को अंतर्राष्ट्रीय हैकर ग्रुप द्वारा चूना लगाने की घटना की बैंक द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद भारत की पूरी बैंकिंग प्रणाली कांप सी गई। हैकर ने 11 अगस्त और 13 अगस्त को दो साइबर हमले में बैंक से कुल 94.42 करोड़ रुपए निकाल लिए। इसकी शुरुआत कनाडा से हुई। इसके बाद हांगकांग और भारत के कुछ एटीएम से पैसे निकाले गए। पहले साइबर हमले में 28 देशों में बैंक को एटीएम स्वाइप के जरिए बैंक को 80.50 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया।

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जबकि दूसरे हमले में स्विफ्ट ट्रांसफर के जरिए 13.92 करोड़ रुपए निकाले गए। कॉस्मोस बैंक के अध्यक्ष मिलिंद ए. काले ने कहा कि नाजुक संचार प्रणाली पर मालवेयर हमले के बाद हैकरों ने विभिन्न भुगतान मार्गो से एक साथ 28 देशों में पैसे निकाले। उन्होंने फटाफट निकासी करना शुरू कर दिया, जिसमें कई मामलों में निकासी की रकम करीब 100 डॉलर थी। उन्होंने छोटी-छोटी रकम इसलिए निकाली, ताकि संदेह पैदा न हो।