रूपये में गिरावट का सिलसिला जारी है। गरुवार को रुपये की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे टूटकर 70.19 के स्तर पर खुला। खुलते ही रुपए में कमजोरी गहराई और रुपया 43 पैसे गिरकर 70.32 के स्तर पर जा पहुंचा, जो रुपया का अबतक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले मंगलवार को रुपया ने 70.10 का ऑलटाइम लो बनाया था। हालांकि मंगलवार को रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंचने के बाद रूपये में हल्की रिकवरी आई थी। और कारोबार के अंत में डॉलर के मुकाबले रूपया 3 पैसे की बढ़त के साथ 69.90 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 1.09 रूपये की कमजोरी के साथ 69.93 के स्तर पर बंद हुआ था।
दरअसल, तुर्की के मेटल इंपोर्ट पर ड्यूटी को अमेरिका ने दोगुनी की थी। जिसके बाद करेंसी मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अमेरिका के इस कदम से तुर्की की करंसी लीरा में 40 फीसदी तक टूट चुका है। इसके अलावा रुपया और यूरो पर भी इसका दबाव देखने मिला। इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स 14 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया था। जिससे रुपए पर दबाव बना हुआ है।
रुपए में गिरावट चिंताजनक नहीं
हालांकि सरकार ने डॉलर के मुकाबले रुपए के ऑलटाइम लो पर फिसलने के विदेशी कारणों को जिम्मेदार ठहराया है, और कहा रुपए में गिरावट चिंताजनक नहीं है। बता दें कि इकोनॉमिक अफेयर्स सेकेट्री सुभाष चन्द्र गर्ग ने कहा, विदेशी कारण आगे चलकर सामान्य हो जाएंगे। गौरतलब है कि तुर्की में इकोनॉमिक और पॉलिटिकल क्राइसिस से डॉलर के मुकाबले रुपया ऑलटाइम लो 70.10 के स्तर पर आ गया।
रुपया 2.51 फीसदी टूटा रुपया
बता दें कि रुपए ने बीते साल डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी, जो अब 2018 की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है। इस साल अभी तक रुपया 10 फीसदी टूट चुका है। वहीं इस महीने रुपया 2.51 फीसदी टूटा है।
रुपए में कमजोरी की वजह
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार, अमेरिका औऱ चीन में ट्रेड वार बढ़ने के बीच ऑयल इम्पोर्टर्स द्वारा डॉलर की डिमांड बढ़ी, जिससे रुपए पर दबाव बना। वहीं अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है।
वहीं एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि तुर्की में आर्थिक संकट की वजह से वहां की करंसी लीरा काफी कमजोर हुआ है। सोमवार को भी लीरा में कमजोरी बढ़ी है, जिससे बैंकिंग शेयर टूटे हैं। इसका असर ग्लोबल मार्केट पर हुआ है। यूरोपीय करंसी में भी स्लोडाउन आने से अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आ रही है। डॉलर इंडेक्स 13 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है।
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