नए पेमेंट सिस्‍टम की वजह से केंद्र सरकार इंटरेस्‍ट (ब्‍याज) पेमेंट्स पर लगभग 10,000 करोड़ रुपए तक की बचत कर सकती है। इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिर्पोट के अनुसार यह रकम आयुष्‍मान भारत या मोदीकेयर की फंडिंग के बराबर है। वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार फंड को जरुरत के समय रिलीज करने से सिस्‍टम में फ्लोट फंड में कमी आई है। इससे ब्‍याज पर बचत हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा विचार सिस्‍टम में मौजूद फ्लोट को कम से कम करने का है।

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फ्लोट फंड एक वित्‍तीय टूल या यंत्र है जो कि बॉन्‍ड या डेब्‍ट जैसे टूल पर निवेश करके ब्‍याज दर के तहत काम करता है।

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जरुरत के समय रिलीज किया जाएगा फंड

फंड को अब तभी रिलीज किया जाएगा, जब योजनाओं पर काम करने वाली एजेंसियों को उसकी जरुरत होगी। महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में करीब से 50,000 से 60,000 करोड़ रुपए का फ्लोट था। इसे अब पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्‍टम (PFMS) प्‍लेटफॉर्म पर लाने के बाद शून्‍य कर दिया गया है।

क्‍या है PFMS

PFMS एक ऐसी व्‍यवस्‍था है, जो पेमेंट प्रक्रिया से लेकर उसकी ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, अकाउंटिंग और रिर्पोटिंग तक के अंत का हल या एक रिजल्‍ट मुहैया कराती है। आपको बता दें कि इसे डिपार्टमेंट ऑफ एक्‍सपेंडिचर की तरफ से प्रशासित और कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट द्वारा लागू किया गया है। यह एक एकीकृत प्‍लेटफॉर्म है, जो फंड को मॉनिटर करता है और यह देखता है कि इसका लाभ अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंचे।

1 लाख एजेंसियों को जोड़ा जा चुका है

वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार लगभग 20 लाख सरकारी एजेंसियों में से 1 लाख को इस मंच से जोड़ा जा चुका है। पोस्‍ट विभाग भी अब PFMS से जुड़ने वाला है। तो वहीं कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट रक्षा मंत्रालय के लिए इस सप्‍ताह एक प्रजेंटेशन की तैयारी कर रहा है, जिसमें बताया जाएगा कि कैसे PFMS उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। अभी तक इन विभागों के पास अपना खुद का कैश मैनेजमेंट सिस्‍टम है। बता दें कि 28 मार्च को 71,633.45 करोड़ रुपए की धनराशि को PFMS पोर्टल के जरिए डिजिटली ट्रांसफर किया गया था।

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