गाड़ियों की आवाजाही के लिए देश में जल्‍द ही परमिट और इंस्‍पेक्‍टर राज खत्‍म हो सकता है। सरकार गुड्स एंड सर्वि‍सेज टैक्‍स की मदद से रोड ट्रांसपॉर्ट को सहज बनाना चाहती है। हम आपको बता दे कि एक सरकारी अधिकारी ने बताया है कि जीएसटी कांउसिल ने स‍िफारिशें मान ली है और संबंधि‍त विभाग इस पर काम शुरु करेंगे।
जीएसटी काउंसिल ने पिछले साल एक टास्क फोर्स बनाई थी, जिसने हर तरह के चेकपोस्ट, रोड टैक्स, पॉलूशन और फिटनेस सहित सभी तरह के स्टेट और नैशनल परमिट हटाने का सुझाव दिया है। वहीं गाड़ियों की आवाजाही को सुगम बनाने के सुझाव देने की जिम्मेदारी टास्क फोर्स को दी गई थी। इसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'वैल्यू ऐडेड टैक्स और एंट्री टैक्स खत्म होने के बाद किसी राज्य के अंदर गाड़ियों की आवाजाही के लिए परमिट सिस्टम की जरूरत नहीं रह गई है। इसलिए स्टेट परमिट, नैशनल परमिट के सिस्टम को खत्म किया जाना चाहिए।' जीएसटी काउंसिल ने पिछले शनिवार की मीटिंग में इस रिपोर्ट की समीक्षा की है।

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देश में पिछले साल 1 जुलाई से जीएसटी लागू हुआ था। केंद्र और राज्‍य के कई टैक्‍स की जगह सिंगल टैक्‍स के रूप में जीएसटी को लाया गया था। इससे देश भर में गाड़‍ियों के जरिये सामान की ढुलाई आसान हुई है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्‍यों की सीमाओं से सारे चेकपोस्‍ट हटाए गए। हालांकि ट्कों और कमर्शियल ट्रांसपोर्टर्स को अभी भी कई बैरियर्स का सामना करना पड़ता है और दूसरे तरह की जांच-पड़ताल के लिए उन्‍हें रोका जाता है।
रोड टैक्‍स, परमिट और पॉल्‍यूशन चेक जैसे मानकों के आधार पर यह इश्‍यू किया जाएगा। जिसके तहत ई-वे बिल के डेटा को रीजनल ट्रांसपोर्ट डेटा बेस से जोड़ने का सुझाव दिया है। इससे फिटनेस, पॉल्यूशन और परमिट सहित गाड़ियों से संबंधित सभी डेटा को इंटीग्रेट किया जा सकेगा। इस योजना के मुताबिक, ट्रांसपॉर्ट डेटाबेस के आधार पर गाड़ी के फिट पाए जाने के बाद ही ई-वे बिल जेनरेट किया जा सकेगा। वहीं हम आपको बता दें क‍ि इस डेटाबेस का विस्तार भी किया जा सकता है। इसमें पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट सहित गाड़ी की सभी डिटेल्स को शामिल किया जा सकता है।वहीं हम आपको इस बात की भी जानकारी दे कि रिपोर्ट में कहा गया रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री माल ढुलाई करने वाली सभी गाड़ियों में जीपीएस टेक्नॉलजी के इस्तेमाल को अनिवार्य बना सकती है। जिसमे सुझाव दिया है कि सभी एन्फोर्समेंट एजेंसियां हर जांच या चेकिंग के रिकॉर्ड दर्ज करें। उसने कहा है कि ई-वे बिल सिस्टम का इस्तेमाल सभी डिपार्टमेंट्स के लिए आइडेंटिटी क्रिएट करने की खातिर किया जा सकता है, जिससे उन्हें वेरिफिकेशन रिपोर्ट्स तैयार करने में मदद मिलेगी।