बीते शु्क्रवार को ट्रांसपॉट यूनियन की स्‍ट्राइक के कारण लाखों ट्रकर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए। देश के बड़े शहरों में ट्रकर्स की हड़ताल जारी है। हम आपको बता दे कि डीजल की बढ़ती कीमतों और टोल फी कम करवाने को लेकर ट्रकों की हड़ताल शुरू हुई है। वही ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपॉर्ट कांग्रेस की हड़ताल से शहरों में दूध और सब्‍ज‍ियों की सप्‍लाइ पर असर हो रहा है। काफी दिक्‍कते भी हो रही है। वहीं इस बात की भी सूचना मिली है कि हड़ताल के कारण करीब 50 लाख ट्रक सड़क पर उतरे। वहीं ट्रक असोसिएशन की मांग है कि ई-वे बिल को आसान बनाया जाए। साथ ही साथ डीजल को भी जीएसटी के अंतर्गत लाने की मांग की गयी हैं। हम आपको बता दे कि लंबे समय से ट्रकों से संबंधि‍त संगठन अपनी मांग रख रहे है। वहीं ये मांग की जा रही राजमार्गों को टोल फ्री बनाया जाए, जिससे निर्बाध तरीके से ट्रांसपॉर्ट हो सके।

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वहीं हड़ताल से पहले एआईएमटीसी के प्रतिन‍िधियों ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक की गई थी लेक‍िन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। वहीं इस संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि हम सरकार से मिले भरोसे से संतुष्ट नहीं हैं। ई-वे बिल क‍ो लेकर संगठन असंतुष्ट हैं। उनकी माने तो बिल फाइल करने में थोड़ी भी गलती हो जाती है तो बड़ा जुर्माना भरना पड़ता है।जबकि शुक्रवार को संसद में अविश्वास प्रस्‍ताव पर बहस के दौरान भी डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के अंतर्गत लाने की बात कही गई थी। मौके पर मौजूद प्रधानमंत्री मोदी ने इस सवाल का जवाब देते हए क‍हा कि यूपीएक के समय में प्रस्‍तावित जीएसटी में ही डीजल और पेट्रोल को इससे अलग रखा गया था।