एक ओर जहां भारतीय राजनीतिज्ञ और अर्थशास्‍त्री भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर अनुमान लगा रहे हैं तो वहीं अंतराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने सोमवार को भारत का आर्थिक विकास दर अनुमान चालू वित्‍त वर्ष में 7.5 फीसदी से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। फिर भी भारत अब भी दुनिया की सबसे तीव्र विकास दर वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शीर्ष स्‍थान पर बना हुआ है। वर्ल्‍ड इकोनॉतिक आउटलुक (WEO) के ताजा आंकलन में इस साल अप्रैल में 0.1 फीसदी और 2019 में 0.3 फीसदी की कटौती की गई है।

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विकास दर घटने का कारण

IMF के अनुसार तेल की ज्‍यादा कीमतें और सख्‍त मौद्रिक नीति इस कटौती की मुख्‍य वजहें हैं। आईएमएफ के अनुसंधान विभाग के निदेशक मौरी ऑब्‍स्‍टफेल्‍ड ने कहा है कि आपूर्ति बाधित होने और भू-राजनीतिक दबाव से तेल की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी के कारण भारत जैसे आयातकों को नुकसान पहुंचा है।

वैश्विक आर्थिक विकास दर

IMF के मुख्‍यालय वॉशिंगटन में ताजा आकलन जारी करते हुए उन्‍होंने कहा कि हमने वैश्विक आर्थिक विकास दर इस साल और अगले साल के लिए 3.9 प्रतिशत पर जारी रखा है, लेकिन यह भी अनुमान है कि बदतर नतीजों का जोखिम निकटवर्ती अवधि में भी बढ़ गया है।

चीन की विकास दर स्थिर

आईएमएफ ने चीन की आर्थिक विकास दर इस साल 6.6 प्रतिशत और अगले साल 6.4 प्रतिशत पर स्थिर रखी है। तो वहीं इंटरनेशनल एजेंसी की रिर्पोट के अनुसार अमेरिका में आर्थिक विकास दर 2018 में 2.9 प्रतिशत और अगले साल 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तो वहीं IMF का मानना है कि व्‍यापार को लेकर बढ़ते तनाव से वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर जोखिम बना हुआ है।

2018 और 2019 के लिए अनुमान

इसके अलावा IMF ने इस साल और अगले साल वैश्विक वृद्धि दर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। फिलहाल जर्मनी, फ्रांस और जापान के वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है। इसमें कहा गया है कि चालू वित्‍त वर्ष में अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रहेगी।