रेलवे कर्मचारियों के संघ ने सातवें वेतन आयोग के प्रावधानों के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के निजीकरण के प्रयास के खिलाफ मंगलवार से देश भर में 72 घंटे की रिले भूख हड़ताल की मांग की है।

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ऑल इंडिया रेलवेमेन्‍स फेडरेशन (AIRF) के अपने एक स्‍टेटमेंट में सोमवार को कहा था कि केंद्र सरकार के संगठनों और गृह मंत्री, वित्त मंत्री, रेल मंत्री और रेलवे राज्य मंत्री के नेताओं के साथ एआईआरएफ की कई बैठकें होने के बावजूद कोई फैसला नहीं लिया गया।

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रेलवे कर्मचारी अपनी कई मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी मांग है कि न्‍यूनतम वेतन में बढ़ोत्‍तरी की जाए। सातवें वेतन आयोग के प्रावधान लागू किए जाएं। इसके अलावा सभी नेशनल पेंशन स्‍कीम धारक कर्मचारियों को गारंटीड पेंशन और फैमिली पेंशन दिए जाने की भी इनकी मांग है। साथ ही रेलवे का निजीकरण करने के प्रयासों का भी ये विरोध कर रहे हैं।

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13-14 मार्च, 2018 को आयोजित जनरल काउंसिल और वर्किंग कमेटी की अपनी बैठकों में एआईआरएफ ने यहां लगातार तीन दिनों के लिए 'मास रिले हंगर स्ट्राइक' को चरणबद्ध करने का फैसला किया।

इसलिए, एआईआरएफ सहयोगियों की सभी शाखाएं 8 मई की सुबह से उपरोक्त 'रिले हंगर स्ट्राइक' पर जा रही हैं, पूरे भारतीय रेलवे ", जिसमें बड़ी संख्या में रेलवे रिले भूख हड़ताल पर बैठेंगे।