भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र का बहु प्रतीक्षित चंद्रयान-2 मिशन जल्द ही उड़ान भरने वाला है। इसरो ने इस बारे में बताया कि चंद्रयान-2 को लेकर सारी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस मामले में इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिम विभाग के सचिव, के सिवन ने इस मिशन के बारे में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को जानकारी दी है। जितेंद्र सिंह परमाणु ऊर्जा मंत्री भी हैं।
हाल ही में GSAT-6A की असफलता से इसरो सतर्क हो गया है और इतने बड़े मिशन को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता है। अब ऐसी खबरें हैं कि इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन को इस वर्ष के लिए टाल दिया है। ये मिशन अब 2019 तक शुरु हो सकेगा। आपको बता दें कि इसरो ने हाल ही में GSAT-6A सेटेलाइट का प्रक्षेपण किया था लेकिन कक्षा में स्थापित होने के बाद सेटेलाइट से संपर्क टूट गया था।
आपको बता दें कि चंद्रयान-2 इसरो का पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें खगोल पींडिय ग्रह पर रोवर को लैंड कराया जाएगा। ये रोवर चंद्रमा की मिट्टी का परीक्षण करेगा और उसके डाटा इसरो की लैब को भेजेगा। यह चंद्रमा की सतह पर अपनी तरह का पहला मिशन होगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 'रोवर' को उतारा जाएगा जिसे काफी दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। वहां करोड़ों साल पहले निर्मित चट्टानें हैं। अन्य देशों के चंद्र मिशनों में इस पहलू का अध्ययन अब तक नहीं किया गया है।
चंद्रयान-2 मिशन की कुल लागत 800 करोड़ रुपए है, जिसमें 200 करोड़ रुपए प्रक्षेपण और 600 करोड़ रुपए उपग्रह पर खर्च होने हैं। इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि, यह लागत 1,500 करोड़ रुपए की लागत के करीब आधी है जो तब खर्च हुई होती जब ऐसे ही मिशन को किसी विदेशी प्रक्षेपण स्थल से प्रक्षेपित किया गया होता।
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