ई-वे बिल की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने इसके लिए समयसीमा बढ़ाने की सुविधा शुरु कर दी है। जिसके अंतर्गत ट्रांसपोर्ट को पहले से जेनरेट ई-वे बिल का टाइम पीरियड बढ़ाया जा सकेगा। ऐसा तब मुमकिन है जब किसी वजह से तय समयानुसार समय पर चीजें नहीं पहुंचा पाएंगे। इस तरह से ई-वे बिल की प्रक्रिया को और आसान बनाया जा सकेगा। अब ट्रांसपोटर्स को ई-वे बिल के समयसमीया को ऑनलाइन बढ़ा सकते हैं। अगर दूरी के अनुसार दिए गए टाइम पीरियड में ट्रांसपोटर्स किसी भी कारण से समय पर स्‍टॉक नहीं पहुंचा पाते हैं तो वह अपने दिनों की समयसीमा को आगे बढ़ा सकते हैं।

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एक ही बार होगी चेकिंग
आपको बता दें कि पहले ट्रांसपोटर्स की गाड़ी हर एक राज्‍य के चुंगी पर चेकिंग के लिए खड़ी होती थी जिसमें कई बार 2 से 3 दिन का समय लग जाता था वो अब नहीं होगा। किसी भी ट्रक या व्‍हीकल की एक बार चेकिंग होने के बाद दोबारा चेकिंग नहीं होगी। यानि कि व्‍हीकल का एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य में स्‍वतंत्र आवागमन होगा। अगर सरकार या टैक्‍स अधिकारी को किसी व्‍हीकल को लेकर जानकारी मिलती है तो उसकी चेकिंग दोबारा की जा सकती है।

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ई-वे बिल को लेकर सत्‍यता

  • अगर प्रोडक्‍ट का ट्रांसपोर्ट जॉब वर्क के लिए किया जा रहा है, तो उस केस में सप्‍लायर या रिजस्‍टर्ड जॉब वर्कर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा।
  • रेलवे, एयर या जहाज के जरिए गुड्स ट्रांसपोर्ट करने पर रजिस्‍टर्ड सप्‍लायर या रेसिपिंट ही ई-वे बिल जनरेट करेगा। इस केस में ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल जनरेट नहीं करेगा। गुड्स की डिलीवरी के समय ई-वे बिल होना जरुरी होगा।
  • ई-वे बिल जनरेट करने पर उसे रिजेक्‍ट और एक्‍सेप्‍ट करने के लिए 72 घंटे का समय मिलेगा।
  • ई-वे बिल की एक दिन की वैलिडिटी 100 किलोमीटर तक के लिए होगी। दूरी में 100 किलोमीटर बढ़ने पर एक दिन ई-वे बिल की टाइम वैलिडिटी में बढ़ता जाएगा।
  • ई-वे बिल तभी बनवाने की जरुरत है जब गुड्स की वैल्‍यू टैक्‍स मिलाकर 50 हजार रुपए से ज्‍यादा है। इसमें जीएसटी में टैक्‍स छूट के दायरे में आने वाले प्रोडक्‍ट और जिन प्रोडक्‍ट को ई-वे बिल बनवाने से छूट मिली है उनके लिए ई-वे बिल नहीं बनाना होगा। वह 50 हजार रुपए की गिनती में भी शामिल नहीं होंगे। ई-वे बिल क्‍या है और यह किस तरह से काम करता है?