भारत में पहले इंटरनेशनल सोलर एलायंस समिट का आयोजन किया गया। इस समिट में 23 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया। भारत के दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों भी इस समिट का हिस्सा रहे। आपको बता दें कि पेरिस समझौते के दौरान पीएम मोदी ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस बनाने की बात कही थी जिसे अब पूरी तरह से साकार कर लिया गया है। आइए जानते हैं इंटरनेशनल सोलर एलायंस के पहले सम्मेलन की कुछ प्रमुख बातों के बारे में।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट का उद्घाटन करते हुए कहा कि, इस नन्हें पौधे की नई संम्भावनाओं में फ्रांस ने बहुमूल्य भूमिका निभाई है। इंटरनेशनल सोलर एलायंस का यह नन्हा पौधा आप सभी के सम्मिलित प्रयास और प्रतिबद्धता के बिना रोपा नहीं जा सकता था। और इसलिए मैं फ्रांस का और आप सबका बहुत बहुत आभारी हूं। 121 सम्भावित देशों में से 61 गठबंधंन से जुड़ चुके हैं। 32 ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को लागू भी कर दिया है लेकिन इस गठबंधन में हम सभी सहयोगी देशों के अलावा हमारे सबसे बड़े साथी हैं सूर्यदेवता जो बाहर के वातावरण को प्रकाश और हमारे संकल्प को शक्ति दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि, भारत में हमने दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि, हमने 2022 तक रीन्यूबल एनर्जी से 175 गीगावाट बिजली उत्पन्न करेंगे जिसमें से 100 गीगावाट बिजली सौर उर्जा से होगी। पीएम मोदी ने आगे कहा कि, हमने इसमे से 20 गीगावाट इंस्टाल्ड सोलर पॉवर लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है, भारत में ऊर्जा की बढ़ोत्तरी अब परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के बजाए रीन्यूबल एनर्जी से अधिक हो रही है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि, भारत में, अटल ज्योति योजना का उद्देश्य अपर्याप्त बिजली वाले क्षेत्रों में सोलर एनर्जी आधारित स्ट्रीट लाइट्स को लगाना है। साथ ही पीएम मोदी ने ये भी बताया कि, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सोलर स्टडी लैंप स्कीम से 7 मिलियन बच्चों को रौशनी मिल रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि, अगर हम सोलर एनर्जी से दूसरी तकनीकों को भी जोड़ दें, तो परिणाम और भी अच्छे हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा 28 करोड़ एलईडी बल्बों के वितरण से पिछले तीन साल में न सिर्फ 2 बिलियन डॉलर से अधिक की बचत हुई है बल्कि 4 गीगा वाट बिजली भी बची, यही नहीं, 30 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साईड भी कम बनी।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सौर ऊर्जा के लिए अतिरिक्त 70 करोड़ यूरो के निवेश की घोषणा की, साथ ही उन्होंने कहा कि 'एक ऐसे ग्रह के लिए जिसे सभी को साझा करना है, संयुक्त रूप से कर्तव्यों के पालन का' आह्वान किया। राष्ट्रपति भवन में 23 देशों के प्रमुखों और 10 मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मैक्रों ने पहले आईएसए सम्मेलन की सह-मेजबानी की।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने सम्मेलन में कहा, "फ्रांस विकास एजेंसी, सौर ऊर्जा के लिए अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप 2022 तक अतिरिक्ति 70 करोड़ यूरो का आवंटन करेगी। इसका मकसद सौर उर्जा की एक हजार गीगावॉट से ज्यादा का परिनियोजन करना और 2030 तक सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक हजार अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा को लाना है।"
मैक्रों ने कहा कि इसमें फ्रांस की कुल 100 करोड़ यूरो की प्रतिबद्धता शामिल है। उन्होंने कहा, "2015 में, हमने कहा था कि हम सदस्य देशों में परियोजना को समर्थन देने के लिए 30 करोड़ यूरो का आवंटन करेंगे। फ्रांस का यह वादा कुछ महीनों पहले ही पूरा हुआ है।" आईएसए में वर्तमान में 121 सदस्य देश और क्षेत्र हैं। इसे संयुक्त रूप से मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांकोइस ओलांदे द्वारा शुरू किया गया था। इसकी नींव 2015 में पेरिस जलवायु समझौते में रखी गई थी।
आईएसए के 121 सदस्यों में से 60 ने संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और करीब 30 राष्ट्रों ने इसे मंजूर किया है। सम्मेलन में मैक्रों ने परोक्ष रुप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि, कुछ देशों (अमेरिका) ने पेरिस समझौते से बाहर होने का फैसला किया है जबकि अन्य ने इस पर कदम उठाने का फैसला किया है क्योंकि वह अपने बच्चों और उनके बच्चों की भलाई चाहते हैं।
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