पिछले साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक जीएसटी कलेक्‍शन में काफी अनियमितता नजर आई है। जिसके चलते यह अनुमान लगाया जा रहा है कि देश में एक बार फिर से महंगाई बढ़ सकती है। रिर्पोट के अनुसार एक ओर जहां जुलाई से सितम्‍बर तक जीएसटी कलेक्‍शन में तेजी देखने को मिली है तो वहीं अक्‍टूबर से दिसंबर तक कलेक्‍शन में कमी आयी है।

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साथ ही ई-वे बिल के पारित होने में हो रही देरी के चलते बिजनेस और भी ज्‍यादा प्रभावित होगा। वैसे तो ई-वे बिल को पारित करने की तारीख जो 1 फरवरी थी उसे 1 अप्रैल 2018 कर दिया गया है। संभावना यह जताई जा रही है कि इसे पारित करने की तारीख और भी आगे न बढ़ जाए। जीएसटी काउंसिल 10 मार्च को होने वाली बैठक में इस बात का निर्णय करेगी। ई-वे बिल को लेकर टैक्‍स एक्‍सपर्ट का कहना है कि 15 जनवरी को जो ट्रायल हुआ था वह सफल हुआ है, जबकि ई-वे बिल पोर्टल उस वक्‍त काम करने में फेल हुआ था।

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आपको बता दें कि ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्‍यादा के अमाउंट के प्रोडक्‍ट की राज्‍य या राज्‍य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा। सरकार का मानना है कि ई-वे बिल के लागू हो जाने से सरकार के लिए टैक्‍स में चोरी पर लगाम कसने में आसानी हो जाएगी।

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अब देखना यह है कि 2018 के अंत तक सरकार जीएसटी को लेकर कितनी सफल और असफल होती है।