करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बने पंजाब नेशनल बैंक ने गुरुवार को दावा किया कि कानूनी रूप से तय किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए उसके पास पर्याप्त परिसंपत्ति व पूंजी है। धोखाधड़ी की घटना से बैंक की वित्तीय स्थिति और संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर शेयर बाजारों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का उत्तर देते हुए पीएनबी ने यह बात कही।
पीएनबी में धोखाधड़ी होने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पास प्राथमिकी दर्ज कराने की सूचना नहीं देने के बारे में पूछे जाने पर बैंक ने कहा, "चूंकि कानून को लागू करने वाली एजेंसियों को जांच का जिम्मा सौंपा गया था, इसलिए किसी खबर के सार्वजनिक होने से धोखेबाज सतर्क हो सकते थे, जिससे रिकवरी प्रभावित हो सकती थी।"
एक्सचेंज की ओर से नीरव मोदी के उस बयान पर भी सवाल किया गया जिसमें उन्होंने कहा कि पीएनबी ने मामले को सार्वजनिक कर बकाये की रिकवरी के सारे विकल्प बंद कर दिए हैं। इसपर बैंक ने कहा, "हमने बकाये की वसूली के लिए देश के कानून के अनुसार जो हमारे पास कानूनी रास्ते उपलब्ध थे उन्हें अपनाया है।"
एक्सचेंज ने बैंक से इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा जिसमें बैंकी की ओर कहा गया कि शुरुआत में धोखाधड़ी की 280 करोड़ रुपये थी जो बाद में हुए खुलासे में बढ़कर करीब 11,000 करोड़ रुपये हो गई। इसका जवाब देते हुए बैंक ने बताया, "पांच फरवरी 2018 को आरंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर हमने अपने बोर्ड और बीएसई व एनएसई को सूचित किया था जिसमें आरंभिक धोखाधड़ी का जो मामला उजागर हुआ वह 280.70 करोड़ रुपये का था।"
बैंक ने आगे बताया, "आगे की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर धोखाधड़ी की राशि 11,394.02 करोड़ रुपये पाई गई जिसको लेकर 13 फरवरी 2013 की शाम को सीबीआई के पास मामला दर्ज किया गया। साथ ही इसकी सूचना 14 फरवरी 2018 को सुबह नौ बजे बीएसई और एनएसई को दी गई।"
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