राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति की नौवीं बैठक में करीब 4,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें उत्तर प्रदेश में कानपुर के जाजमऊ स्थित चमड़ा शोधन कारखानों के लिए 20 एमएलडी सार्वजनिक अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र शामिल है। 629 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली तीन चरणों की इस परियोजना में 380 अलग-अलग चमड़ा शोधन इकाइयों में पूर्व शोधन इकाई, एक 20 सीईटीपी होगा, जिसमें प्राकृतिक, जैविक और उन्नत शोधन की व्यवस्था होगी। इसके अलावा जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) आधारित 200 केएलडी क्षमता का प्रमुख संयंत्र होगा। इस परियोजना में केन्द्र की हिस्सेदारी 472 करोड़ रुपए है। कानपुर औद्योगिक शहर से गंगा में होने वाले प्रदूषण को खत्म करने के लिए यह एक प्रमुख कदम है। इस परियोजना को विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) -जाजमऊ चमड़ा शोधन एसोसिएशन द्वारा अमल में लाया जाएगा।
कानपुर के जाजमऊ, बिनगवां, साजरी में सीवेज शोधन बुनियादी ढांचे के पुनर्वास और समेकन के लिए हाईब्रिड एन्युईटी-पीपीपी मोड के अंतर्गत 967.23 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली एक अन्य परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में पंखा में 30 एमएलडी एसटीपी का निर्माण शामिल है। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी।
इलाहाबाद में नैनी, सलारी, नुमायादही, राजापुर, पोनघाट, पोडरा सीवरेज क्षेत्रों में सीवेज शोधन बुनियादी ढांचे के पुनर्वास और समेकन के लिए हाईब्रिड एन्युईटी-पीपीपी मोड के अंतर्गत 904 करोड़ रुपए की एक परियोजना को मंजूरी दी गई है। उपयुक्त कार्यान्वयन के लिए सभी एसटीपी और एसपीएस के लिए एक ऑन लाइन निगरानी प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी।
गंगा नदी में जाने वाले नालों के मूल स्थान/मूल स्थान से दूर जैव उपचारात्मक शोधन की एक परियोजना को भी मंजूरी दी गई है, जिस पर अनुमानत: 410 करोड़ रुपए लागत आएगी। एनएमसीजी ने सीपीसीबी और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के जरिए प्रदूषण फैलाने वाले अन्य प्रमुख नालों की पहचान की है, जो मुख्य पाइप में जाकर मिल जाते हैं। यहां टेक्नोलॉजी सेवा प्रदाता गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण को कम करने के लिए कंटेनराइज्ड मॉडयूलर शोधन संयंत्रों सहित शोधन सुविधाएं स्थापित करेंगे। पहचान गए नालों को इसके बाद प्राथमिकता वाले नालों में वर्गीकृत किया गया है, जहां तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। परियोजना के पहले चरण में शोधन के लिए 20 नालों को ध्यान में रखा गया है। बुनियादी ढांचे के विकास की अंतरिम अवधि के लिए नालों में प्रदूषण के दबाव का प्रबंध करने के लिए मूल स्थान पर/मूल स्थान के बाहर तेजी से, तकनीकी-आर्थिक और सतत टेक्नोलॉजी अपनाने तथा गंगा नदी में सीधे सीवेज छोड़े जाने के संचयी प्रभाव के प्रबंध के लिए यह कदम उठाया गया है। यह समग्र दृष्टिकोण नमामि गंगे कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए अपनाया गया है, ताकि गंगा नदी में सीवेज का प्रवाह रोका जा सके।
पश्चिम बंगाल में हाईब्रिड एन्युईटी मोड के अंतर्गत गार्डन रीच एसटीपी (57 एमएलडी) और केवड़ापुकुर एसटीपी (50 एमएलडी) के लिए 15 वर्ष के संचालन और रख-रखाव के साथ पुनर्वास की एक परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस पर 165.16 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी।
बिहार में बेगुसराय, हाजीपुर और मुंगेर में तीन सीवेज बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रमश: 230.06 करोड़ रुपए, 305.18 करोड़ रुपए और 294.02 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की संशोधित मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में केन्द्र की हिस्सेदारी क्रमश: 161.04 करोड़ रुपए, 213.63 करोड़ रुपए और 205.81 करोड़ रुपए होगी। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी।
बैठक की अध्यक्षता जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में सचिव और एनएमसीजी महानिदेशक यू.पी. सिंह ने की। बैठक में मंत्रालय और एनएमसीजी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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