पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों से जनता परेशान हो चुकी है। सरकार की तरफ से संसद से लेकर सड़क तक लगातार पेट्रोल को जीएसटी में लाने का कोरा आश्वासन दिया जा रहा है। सरकार से जब भी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और उसे जीएसटी में लाने के लिए प्रश्न किया जाता है तो वह सारे सवाल जीएसटी काउंसिल पर डाल देती है। वहीं जीएसटी काउंसिल अपनी बैठकों में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने में पर चर्चा तक नहीं करती है।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। मध्य प्रदेश में सड़क के नाम पर लगाए गए एक प्रतिशत सेस के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमत अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल 78.71 और इंदौर 78.73 रुपए प्रति लीटर हो गया। वहीं बालाघाट में पेट्रोल सबसे महंगा 80.11 रुपए प्रति लीटर की कीमत पर बिक रहा है।
मध्यप्रदेश राज्य सरकार के रविवार रात से एक प्रतिशत सेस लागू करने के बाद से पेट्रोल की कीमत पर में 85 पैसे और डीजल की कीमत में 76 पैसे इजाफा हुआ है। सेस से पहले से ही लगातार महंगे हो रहे डीजल के दाम को भी 67.53 प्रति लीटर कर दिया।
बात अगर दिल्ली की करें तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। दिल्ली में पेट्रोल 72.92 रुपए प्रति लीटर हो चुकी है जबकि डीजल के दाम 65.67 पैसे तक पहुंच चुके हैं। वहीं मुंबई में पेट्रोल के दाम 80.79 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। मुंबई में डीजल के दाम भी आसमान छू रहे हैं, डीजल 68.15 रुपए प्रति लीटर की दर पर मुंबई में मिल रहा है।
सरकार को ये समझ लेना चाहिए कि मीठी बातें करके अब वह जनता को मूर्ख नहीं बना सकते हैं। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द पेट्रो पदार्थों के दाम या तो कम करने चाहिए या फिर जीएसटी के अंतरगत लाकर जनता को राहत देने का काम करना चाहिए। आइए जानते हैं पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दाम से कैसे सरकार का खजाना बढ़ा है।
दुनिया में कच्चे तेल के दामों में लगातार गिरावट आ रही है, मगर हमारे देश में पेट्रोलियम पदार्थो के दाम बढ़ रहे हैं। इससे उपभोक्ता की जेब खाली हो रही है और सरकार का खजाना भर रहा है। बीते आठ माह की अवधि में सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले कर से 1,50,000 करोड़ रुपए की कमाई की है।
डायरेक्ट्रोरेट जनरल ऑफ सिस्टम्स एंड डाटा मैनेजमेंट द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार को इस वित्तीय वर्ष के आठ माह यानी अप्रैल, 2017 से नवंबर, 2017 की अवधि में कुल 1,50,019.23 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है। इसमें केंद्रीय एक्साइज से हुई आमदनी 1,43,896.64 करोड़ रुपए और कस्टम ड्यूटी (इंपोर्ट) से हुई आय 6123.10 करोड़ रुपए है।
एजेंसी के माध्यम से समाचार पोर्टलों में प्रकाशित खबरों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के नीमच जिले के निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने डायरेक्ट्रोरेट जनरल ऑफ सिस्टम्स एंड डाटा मैनेजमेंट से सूचना के अधिकार के तहत जानना चाहा था कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के पहले 9 माह में पेट्रोलियम पदार्थो से कुल कितने राजस्व की प्राप्ति हुई है। इन 9 माह का माहवार ब्यौरा उपलब्ध कराएं। जिसके बाद उन्हें आठ माह का ही ब्यौरा मिला है।
ब्यौरे के मुताबिक, मई माह में केंद्र सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व 20,260 करोड़ रुपए बतौर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी के रूप में प्राप्त हुए, वहीं सबसे ज्यादा कस्टम ड्यूटी के तौर पर जून माह में 1883 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। वहीं सबसे कम सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी के जरिए 16,952 करोड़ नवंबर में और कस्टम ड्यूटी से अप्रैल माह में 371 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।
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