बजट 2018 के पेश होने से पहले सरकार ने एक पीएसयू बैंकों को लेकर एक बड़ा ऐलान कर दिया है। अब जल्द ही पीएसयू बैंकों में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की पूंजी डाली जाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पर कहा है कि बैंकों की समस्या को खत्म करना हमारा मकसद है। वित्त मंत्रालय एक ऐसा मकैनिज्म बनाने की कोशि कर रहा है कि जिसमें पहले से आ रही दिक्कतों का समाधान हो सके।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि अक्टूबर 2017 में बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन का फैसला हुआ था। इसमें बैंक रीकैपिटलाइजेशन का दायरा बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया था। लगातार बढ़ रहे एनपीए के कारण सरकारी बैंकों की हालत खराब हो चुकी है। उनका मकसद सरकारी बैंकों में बेहतर गवर्नेंस बरकरार रखना है।
तो वहीं बैंकिंग सचिव ने कहा कि सरकारी बैंकों में रखा आम आदमी का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। सभी बैंकों में जरुरी फंड का जो स्तर चाहिए उसे बरकरार रखा जाएगा।
- एसबीआई- 8800 करोड़ रुपए
- पीएनबी- 5470 करोड़ रुपए
- बैंक ऑफ बड़ौदा- 5375 करोड़ रुपए
- IDBI बैंक- 10610 करोड़ रुपए
- बैंक ऑफ इंडिया- 9232 करोड़ रुपए
- यूको बैंक- 6507 करोड़ रुपए
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 5158 करोड़ रुपए
- इंडियन ओवरसीज बैंक- 4694 करोड़ रुपए
- ओरिंटल बैंक ऑफ कॉमर्स- 3571 करोड़ रुपए
- देना बैंक- 3045 करोड़ रुपए
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र- 3173 करोड़ रुपए
अरुण जेटली ने यह साफ किया है कि बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन के तौर पर कितना पैसा मिलेगा यह उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। सरकार बैंकों के प्रदर्शन को इस आधार पर निर्णय करेगी की कस्टमर को लेकर उनका रिस्पांस कैसा है।
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