अब तक आपको आधार तो फ्री में मिलता ही था साथ ही आधार से जुड़ी किसी भी प्रकार की सर्विस के लिए आपको कुछ राशि देने की जरुरत नहीं होती थी। लेकिन अब आपको आधार से जुड़ी सर्विसेज के लिए भी भुगतान करना पड़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करते समय यह भी ध्‍यान रखा जाएगा कि आम लोगों पर इसका ज्‍यादा बोझ न पड़े।

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प्रति व्‍यक्ति आधार रजिस्‍ट्रेशन पर आने वाले खर्च में पिछले दो वर्षों में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हो गई है। ऐसे में सरकार ने तय किया है कि वह जल्‍दी से इस पर सरकारी खर्च को बंद कर इसकी सेवाओं से ही इसके लिए धन जुटाएगी।

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शुरु हो चुकी है तैयारी

अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए तैयारी भी शुरु हो गई। इस बारे में यूआईडीएआई में चर्चा भी हो चुकी है। साथ ही यह माना जा रहा है कि आधार को लोकप्रिय बनाने के लिए इसे पेटीएम, ओला और उबर जैसी सेवाओं का मॉडल अपनाना होगा।

ओला, उबर और पेटीएम जैसी सेवाएं

ओला, उबर और पेटीएम जैसी सेवाएं बाजार में मौजूदा विकल्‍पों को खत्‍म कर लोगों को खुद पर निर्भर बनाने के लिए मॉडल पर काम करती हैं। ये लंबे समय तक घाटे में रहते हुए निवेश करते रहने के बाद मुनाफे के लिए अपनी सेवाओं के मूल्‍य बढ़ाती हैं।

वित्‍तीय लेनदेन में होगी बढ़ोत्‍तरी

सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में आधार अनिवार्य नहीं है उनमें भी कंपनियां ई-केवाईसी के लिए इसका इस्‍तेमाल शुरु करेंगी। आधार से वित्‍तीय लेन-देन में बढ़ोत्‍तरी होगी। ये ऐसी सेवा है जो बिना किसी कार्ड या एप के सिर्फ अंगूठा लगा कर लेन-देन मुमकिन कर रही है।

सरकार की ओर इतनी मिलेगी मदद

आधार के लिए रजिस्‍ट्रेशन करने वाली एजेंसी को जहां पहले सरकार की ओर से प्रति कार्ड 10 रुपए की सहायता दी जाती थी, अब उसे 25 प्रतिशत बढ़ा कर 50 रुपए प्रति कार्ड किया जा रहा है। अब काफी कम लोगों का ही कार्ड बनाना होता है। ऐसे में लागत बढ़ती जाएगी।