प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की एक ऐसी स्कीम है जिसमें आम आदमी को खुद का घर बनाने में रियायती दरों पर ब्याज मिलता है। वहीं अब केंद्र सरकार इस योजना को और भी आकर्षक बनाने जा रही है। अब पीएम आवास योजना (PMAY) के तहत केंद्र सरकार आपको घर बनाने के लिए एडवांस रकम देगी। हालांकि एडवांस रकम के लिए आपको एक शर्त पूरी करनी पड़ेगी।
अगर आपके पास खुद का प्लॉट (भूखंड) है तो पीएम आवास योजना आपके लिए फायदे का सौदा है। सरकार की नई योजना के तहत भूखंड मालिकों को मकान बनाने के लिए एडवांस पैसा दिया जाएगा। इस नीति के जरिए सरकार 2022 सबको घर देने की अपनी योजना को पूरा करना चाहती है। पीएम आवास योजना के तहत चौथी श्रेणी में आने वाले लाभार्थियों के आवेदन स्वीकार होने के बाद मकान बनाने के लिए 50 हजार रुपए एक मुश्त उनके खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
इस योजना को सबसे पहले उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने शुरु किया है।इससे पहले योजना के तहत पहली किश्त भूखंड मालिक के मकान की नींव तैयार होने के बाद दी जाती थी। पर अब ये पहले ही मिल जाया करेगी। इस योजना से खुद का भूखंड रखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को यूपी सरकार ने बड़ी राहत दी है।
जी न्यूज पोर्टल में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस योजना में दूसरी किश्त में 1.5 लाख रुपए मिलेंगें। जिसे छत या फिर सरकारी या आम भाषा में कहें तो लेंटर डालने के लिए दी जाएगी। जबकि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आपको 50 हजार रुपए और मिलते हैं। ये इस योजना की तीसरी और आखिरी किश्त होती है। इस तरह से आपको 2.5 लाख रुपए की मदद सरकार की तरफ से मिलती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सबके लिए आवास शहरी मिशन को चार श्रेणी में विभाजित किया गया है। इसमें पहली ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी योजना, दूसरी भूमि का संसाधन के रूप में उपयोग करके स्लम पुनर्विकास तीसरी भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी/AHP) और आखिरी श्रेणी में लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण एवं विस्तार शामिल है। इस स्कीन का लोग खूब फायदा उठा रहे हैं, केंद्र सरकार का सपना है कि हर व्यक्ति के पास 2022 तक अपना मकान होना चाहिए।
लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास श्रेणी का निर्माण एवं विस्तार के लाभार्थियों को अब तक नियमानुसार 1.50 लाख केंद्र व एक लाख राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है। पहले के नियम में आवेदन स्वीकार होने पर लाभार्थी द्वारा नींव लेवल का निर्माण कार्य पूरा होने पर 40 फीसदी राशि दी जाती थी। शासन स्तर में समीक्षा हुई तो सामने आया कि इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश लाभार्थियों आर्थिक रूप से इतने कमजोर हैं कि वे अपने संसाधनों से नींव लेवल तक का निर्माण नहीं करा सकते हैं। जिसके बाद से केंद्र ने लोगों को शुरुआत से मदद देने का फैसला किया है।
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