देश में इस बार आम बजट फरवरी में पेश किया जाएगा। ऐसा मान कर चलिए कि 2018 का बजट मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे जिससे बजट पर असर पड़ सकता है। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 2018 के आम बजट में मध्यमवर्ग को राहत दे सकती है।
मोदी सरकरा की प्राथमिकता है कि वह महंगाई कम करे जिससे लोगों को राहत मिले। वहीं नौकरी पेशा लोग जीएसटी और इनकम टैक्स की दोहरी मार से परेशान हैं। ऐसे में वित्तमंत्री 2018 के बजट में नौकरी पेशा लोगों को टैक्स में छूट का लाभ दे सकते हैं। वहीं पार्टी और मंत्रिमंडल में भी इस बात के चर्चे हैं कि बजट 2018 में मिडिल क्लास के लोगों का खास ख्याल रखा जाएगा।
आम बजट 2018 में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है आयकर। सरकार टैक्स में छूट, स्वास्थय बीमा पर अतिरिक्त लाभ और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों को बढ़ा सकती है। पिछले कुछ महीनों में भारत में लोगों ने म्यूचुअल फंड में खूब निवेश किया है और अच्छा रिटर्न भी प्राप्त किया है जिसके चलते सरकारी टैक्स सेविंग स्कीमों के प्रति लोगों में रुचि कम हुई है।
जीएसटी के कारण इस बार सरकार के बजट का बोझ काफी हल्का हो जाएगा। तमाम चीजें जिन्हें लेकर बजट में दाम और टैक्स तय किए जाते थे उसका काम अब जीएसटी काउंसिल के जरिए हो रहा है। जीएसटी काउंसिल हर महीने बैठक में वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले टैक्स पर विचार करती है। हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने तमाम वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स की दरों में भारी कटौती की है जिससे लोगों को राहत मिली है।
समाचार पोर्टल नवभारत टाइम्स ने सूत्रों के हवालों से खबर प्रकाशित करते हुए लिखा है कि, कॉर्पोरेट टैक्स में कमी और जीएसटी के चलते रेवेन्यू घटने की वजह से सरकार को लोगों को रियायत देने के लिए संसाधन तलाश करने होंगे। सरकार का एक वर्ग स्टॉक मार्केट ट्रांजैक्शंस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स को बढ़ाने के पक्ष में है। सूत्रों के मुताबिक 5 लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर यह राहत मिलेगी। इसके अलावा लेवी भी 10 फीसदी से भी कम की जा सकती है। एनडीए सरकार मिडल क्लास और गरीब तबके के लोगों को लुभाने वाला बजट पेश करने की तैयारी में है।
NBT वेबपोर्टल ने आगे लिखा है कि, हाल ही में इस वर्ग को राहत देने के लिए सरकार ने 200 आइटम्स को 28 पर्सेंट जीएसटी के दायरे से बाहर किया है। नाम उजागर न करने की शर्त पर एक सूत्र ने कहा, 'इससे 5,000 निवेशकों पर असर होगा, लेकिन इससे 5 करोड़ परिवारों को लाभ भी होगा।' सूत्रों का कहना है कि फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली के साथ चर्चा के बाद पीएम मोदी राजनीतिक लिहाज से बड़ा फैसला लेते हुए टैक्स में रियायत दे सकते हैं।
NBT वेबपोर्टल ने आगे लिखा है कि, नाम उजागर न करने की शर्त पर एक सूत्र ने कहा, 'इससे 5,000 निवेशकों पर असर होगा, लेकिन इससे 5 करोड़ परिवारों को लाभ भी होगा।' सूत्रों का कहना है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली के साथ चर्चा के बाद पीएम मोदी राजनीतिक लिहाज से बड़ा फैसला लेते हुए टैक्स में रियायत दे सकते हैं।
अभी सरकार ने 2.5 लाख तक की आय पर टैक्स में पूरी तरह से छूट देने का नियम बनाया है।
- 2.5 से उपर और 5 लाख रुपए तक 5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
- जबकि 5 लाख से अधिक और 10 लाख रुपए तक की सालाना आय पर 20 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
- वहीं 10 लाख से अधिक की सालाना आय पर 30 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है।
- वहीं अगर 50 लाख से 1 करोड़ रुपए सालाना आय है तो आयकर और 10 प्रतिशत सरचार्ज देना होता है।
- 1 करोड़ से उपर की आय पर 15 प्रतिशत सरचार्ज देना पड़ता है। इसके अलावा पूरे आयकर और सरचार्ज का 3 प्रतिशत सेस भी देना अनिवार्य होता है।
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