यह माना जा रहा है कि रियल एस्टेट भी अब जीएसटी के दायरे में आ सकता है। सूत्रों की मानें तो सरकार रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में बढ़ रही है। इसकी चर्चा 18 जनवरी को नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल में हो सकती है। वैसे तो काउंसिल द्वारा इस पर निर्णय लेने के बाद ही इसका असली स्वरुप साफ हो पाएगा, लेकिन केंद्र ने राज्यों को जो विकल्प सुझाए हैं, उसमें जीएसटी के दायरे में रियल एस्टेट को लाने के बाद स्टाम्प ड्यूटी और प्रॉपर्टी टैक्स जारी रखने का विकल्प भी है।
एक्सपर्ट की इस बारे में यह मानना है कि देश की जीडीपी में करीब 8 प्रतिशत योगदान और कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले रियल एस्टेट सेक्टर की इससे परेशानी और बढ़ सकती है क्योंकि होम बायर्स पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाएगा।
रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लोने से केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को अधिक राजस्व मिलेगा। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा से बंदरगाह और हवाईअड्डे सहित होटल जैसे व्यवसायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसे रियल एस्टेट में कालेधन को खत्म करने के लिए मजबूत हथियार के रुप में भी देखा जा रहा है।
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