अगर किसी एक क्षेत्र को सबसे ज्यादा सरकारी मदद की जरूरत है, तो वह कृषि क्षेत्र है, जिसे आगामी बजट में सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। कृषि के क्षेत्र में खरीफ के उत्पादन में बड़ी गिरावट देखी जा रही है, जिसके कारण चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के प्रदर्शन में कृषि क्षेत्र की रफ्तार में गिरावट दर्ज की गई।
एसोचैम ने रविवार को यह बातें कही। एसोचैम ने कहा कि साल-दर-साल आधार पर वित्त वर्ष 2017-18 की जुलाई-सितंबर तिमाही में कृषि का जीवीए (सकल मूल्य वृद्धि) 4.1 फीसदी से गिरकर 1.7 फीसदी रहा। इसकी गणना मूल कीमतों के आधार पर की जाती है।
मौजूदा कीमतों में गिरावट 10 फीसदी से घटकर 3.7 फीसदी पर आ गई है। इसके कारण चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में खाद्यान्न उत्पादन में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 2.8 फीसदी रही, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में यह 10.7 फीसदी पर थी।
एसोचैम ने कहा, "निश्चित रूप से, खरीफ उत्पादन में इस गिरावट पर मॉनसून के दूसरे चरण में हुई कम बारिश का भी असर रहा है। इसके अलावा कई कृषि वस्तुओं के मूल्य में संकट के कारण भी प्राप्तियों में कमी देखी गई है, जैसा कि वर्तमान कीमतों पर वृद्धि दर में गिरावट देखी जा रही है।"
भारतीय कारोबारी जगत का प्रमुख हिस्सा मुख्य रूप से कृषि मांग पर निर्भर है, अगर तुरंत अल्पकालिक और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए गए तो कृषि मांग में कमजोरी बरकरार रहेगी। निकट अवधि में जारी रबी सीजन में किसानों को सभी किस्म की मदद मुहैया करानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिचौलिये उनका लाभ ना उठा पाएं।"
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान