रिजर्व बैंक ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस तरह रेपो रेट 6 फीसदी पर बरकरार रहेगा। इसी के साथ रिवर्स रेपो रेट भी बिना बदलाव के 5.75 फीसदी पर कायम रहेगा। वहीं आरबीआई ने सरकार से जीएसटी को और भी सरल बनाने की अपील की है।
इससे पहले सरकार को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कटौती करेगा। जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर तीन साल के न्यूनतम स्तर 5.7 प्रतिशत पर आ गई। कई विशेषज्ञों और उद्योग मंडलों ने भी मुद्रास्फीति में कमी और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये तत्काल कदम उठाए जाने के मद्देनजर प्रमुख नीतिगत दर में कटौती पर जोर दिया है। हालांकि, बैंक के शीर्ष अधिकारियों का विचार है कि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति में वृद्धि को देखते हुए यथास्थिति बनाए रख सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बनाए रख सकता है। वह निम्न वृद्धि, मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच फंस गया है।
मॉर्गन स्टैनली ने एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा, हमारा अनुमान है कि रिजर्व बैंक आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बरकरार रखेगा। इसका कारण बढ़ती मुद्रास्फीति और इसमें और बढ़ोतरी का अनुमान है। इसका आशय है कि नीतिगत दर में कटौती की गुंजाइश सीमित है। हालांकि, पिछले सप्ताह वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कटौती कर सकता है क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति नीचे बनी हुई है।
वहीं उद्योग जगत पहले ही आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने को लेकर नीतिगत दर में कटौती की वकालत कर चुका है। उद्योग मंडल एसोचैम ने रिजर्व बैंक और मौद्रिक नीति समिति को पत्र लिखकर रेपो रेट में कम-से-कम 0.25 प्रतिशत की कटौती करने को कहा था। उसका कहना था कि अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में वृद्धि को पटरी पर लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
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