कंपनियों को पिछले साल के रेवन्‍यू के आधार पर रैंकिंग देने वाले फॉर्चून ग्‍लोबल 500 की लिस्‍ट में इस बार एशियाई कंपनियों का कब्‍जा है। दुनियाभर की शीर्ष 500 कंपनियों में 40 फीसदी एशियाई कंपनियां हैं। कुल 197 एशियाई कंपनियों को इस लिस्‍ट में जगह मिली है। ये लिस्‍ट साल 2016 में कंपनियों की कमाई के आधार पर तैयार की गई है। इस लिस्‍ट में कुल 7 भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं, जिसमें इंडियन ऑयल टॉप 200 में जगह बनाने वाली इकलौती भारतीय कंपनी हैं।

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अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों का दबदबा

फॉर्चून 500 की लिस्‍ट को देखकर यह साफ हो चुका है कि एशिया अब कमाई के मामले में बाकी महाद्वीपों से आगे निकल चुका है। इस लिस्‍ट में उत्‍तरी अमेरिका क्षेत्र की 145 कंपनियां शामिल हैं, तो 143 यूरोपीय कंपनियों को भी इसमें जगह मिली है। कभी इस लिस्‍ट में अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों का ही दबदबा रहता था, पर इस साल एशियाई कंपनियों ने अमेरिकी-यूरोपीय कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्‍ट में बाकी महाद्वीपों की महज 14 कंपनियां ही जबह बना सकी हैं।

7 भारतीय कंपनियां भी हैं शामिल

फॉर्चून ग्‍लोबल 500 की लिस्‍ट में जो 7 भारतीय कंपनियां हैं उनमें इंडियन ऑयल शीर्ष पर है। हालांकि फॉर्चून ग्‍लोबल 500 की लिस्‍ट में इंडियन ऑयल दुनिया भर की कंपनियों में 168 वें स्‍थान पर है, पर बाकी की भारतीय कंपनियां टॉप 200 से बाहर ही हैं। भारत की बाकी कंपनियों में से रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, एसबीआई, टाटा मोटर्स, राजेश एक्‍सपोर्ट्स, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम हैं।

132 कंपनियों के साथ अमेरिका नंबर 1 पर

देशों के लिहाज से देखें तो 132 कंपनियों के साथ अमेरिका पहले नंबर पर है। चीन 109 कंपनियों के साथ दूसरे स्‍थान पर है जो जापान की 51 कंपनियों की इस लिस्‍ट में शामिल हैं। इस लिस्‍ट में 15 दक्षिण कोरियाई कंपनियां भी शामिल हैं।

वॉलमार्ट है नंबर 1 पर

वॉलमार्ट सबसे ज्‍यादा रेवन्‍यू के साथ पहले नंबर पर है। अगले तीन पोजिशन्‍स पर चीनाी कंपनियों-स्‍टेट ग्रिड, सिनोपेक और चाइना पेट्रोलियम का कब्‍जा है। फॉर्चून ग्‍लोबल 500 की लिस्‍ट में भले ही चीन का दबदबा सरकार के स्‍वामित्‍व वाली कंपनियों के कारण लेकिन अब चीन की प्राइवेट कंपनियां भी इस लिस्‍ट में जगह बना पाने में कामयाब हो रही हैं।