प्रख्यात अर्थशास्त्री तथा नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ने मंगलवार को कहा कि कृषि आय को कर के तहत लाकर कर के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स पर मिलने वाली छूट को भी खत्म करने की जरूरत है। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए विवेक देवरॉय ने कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स का बेस बढ़ाने के लिए इस पर मिलने वाली छूट को खत्म करने तथा कृषि आय पर एक हद तक कर लगाने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा, "किसानों को कृषि आय पर ही कर से छूट नहीं मिलती, बल्कि उनके गैर कृषि आय पर भी कर नहीं लगता।" यह पूछे जाने पर कृषि आय पर लगने वाले कर की अधिकतम सीमा क्या होनी चाहिए, देवरॉय ने कहा कि यह शहरी क्षेत्रों के बराबर होना चाहिए।

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वहीं केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार की कृषि आय पर किसी तरह का भी कर लगाने की कोई योजना नहीं है। जेटली ने नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय के इस संबंध में दिए गए सुझाव को खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि संविधान में दिए गए प्रावधानों एवं शक्तियों के तहत केंद्र सरकार के पास कृषि आय पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है।

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आपको बता दें कि नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय ने कहा था कि वह कृत्रिम रूप से बनाई गई ग्रामीण-शहरी पहचान में यकीन नहीं करते हैं इसलिए शहरों में पर्सनल इनकम टैक्स पर लगने वाले कर की जो सीमा है, वही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी होनी चाहिए।

देवरॉय ने कहा, "सबसे अहम बात यह है कि हम क्या कर सकते हैं, हमें किसानों की एक साल की आमदनी देखने की जगह तीन या पांच साल को आधार बनाकर उनका औसत निकालना चाहिए, क्योंकि कृषि आय में हर साल उतार-चढ़ाव होता रहता है।"

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उन्होंने कहा, "इसके अलावा, अधिकतम सीमा शहरी तथा ग्रामीण दोनों के लिए बराबर होना चाहिए।" संवाददाता सम्मेलन के दौरान, नीति (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिग इंडिया) आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने पहले के पांच वर्ष की जगह तीन साल की कार्य योजना के मसौदे का विवरण साझा किया।

पनगढ़िया ने कहा कि अगले तीन वर्षो के दौरान, कर चोरी से निपटने, कर का दायरा बढ़ाने तथा सुधारों के माध्यम से कर प्रणाली को सरल करने की जरूरत है।