हर बार की तरह इस बार भी बजट में रक्षा बजट पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया है। भारत का रक्षा बजट इस बार कुल बजट का 12.77 फीसदी है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में रक्षा उपक्रमों में खर्च के लिए 2 लाख 74 हजार 114 करोड़ रुपए का बजट देने का एलान किया। इस बार का रक्षा बजट पिछली बार के रक्षा बजट से 10 फीसदी अधिक है। वहीं पिछली बार भी 2016-17 के बजट में रक्षा बजट में 10 फीसदी का इजाफा हुआ था।
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पाकिस्तान और चीन से सटी हजारों किलोमीटर की लंबी सीमा की जल, थल और वायु में सुरक्षा के लिए बजट का बड़ा हिस्सा रक्षा के हिस्से में जाता है। दुनिया के तमाम देश हैं जो रक्षा पर बहुत ज्यादा खर्च करते हैं। आगे पढ़िए दुनिया के उन 10 देशों के बारे में जो रक्षा पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं।
दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका अपने रक्षा खर्चों में किसी तरह की ढील नहीं होने देता है। अमेरिका का कुल रक्षा बजट 596 बिलियन डॉलर है, जो कि अमेरिका के कुल जीडीपी का 3.3 फीसदी है।
ग्लोबल पॉवर बनने की चाहत रखने वाला चीन हर साल अपना रक्षा बजट बढ़ाता रहता है। चीन के बारे में ये भी कहा जाता है कि उसका छुपा हुआ रक्षा खर्च बताए गए रक्षा बजट से बहुत ज्यादा होता है। फिलहाल चीन रक्षा खर्च के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है चीन का कुल रक्षा बजट 215.0 बिलियन डॉलर है जो कि चीन की जीडीपी का 1.9 फीसदी है।
तेल का उत्पादन करने वाला देश सऊदी अरब अपने रक्षा उपक्रमों पर जमकर खर्च करता है। सऊदी अरब का कुल रक्षा बजट 87.2 बिलियन डॉलर है जो कि उसकी कुल जीडीपी का 13.2 फीसदी है।
दुनिया का सबसे बड़ा देश रुस अपने रक्षा बजट पर खर्च के मामले में चौथे स्थान पर आता है। रुस का कुल रक्षा बजट 66.4 बिलियन डॉलर है जो कि उसके कुल जीडीपी का 5.4 फीसदी है। रुस दुनिया में हथियारों के सबसे बड़े निर्यातको में से एक है।
यूरोप का सबसे शक्तिशाली देश ब्रिटेन अपने रक्षा बजट पर किसी भी यूरोपीय देश से ज्यादा खर्च करता है। ब्रिटेन का कुल रक्षा बजट 55.5 बिलियन डॉलर है जो कि ब्रिटेन की जीडीपी का 2.0 फीसदी है। रक्षा बजट पर खर्च के मामले में ब्रिटेन 5वें स्थान पर है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना भारत में है। पाकिस्तान और चीन जैसे खतरों से निपटने के लिए भारत को अपने रक्षा बजट पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। भारत रक्षा बजट पर खर्च के मामले में दुनिया में 6वें स्थान पर है। हाल ही में भारत ने सउदी अरब को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा हथियार आयत करने वाले देशों में पहले नंबर आ गया है। हालांकि अब तमाम भारतीय और विदेशी कंपनियां भारत के रक्षा उपक्रमों में निवेश कर रही हैं। अर्जुन टैंक, तेजस फाइटर जेट इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा भारत धनुष तोप, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम पिनाका, इंन्सास राइफल, बुलेटप्रूफ जैकेट-हेलमेट, सेना के लिए विशेष ट्रक-गाड़ियां, मिसाइल, अरिहंत पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे तमाम हथियार और सैन्य उपकरण बना रहा है। वहीं अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन भारत में F-16 लड़ाकू विमान का कारखाना खोलने में रुचि दिखा रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत धीरे-धीरे रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर हो रहा है।
फ्रांस रक्षा बजट पर खर्च के मामले में 7वें स्थान पर आता है। फ्रांस का कुल रक्षा बजट 50.9 बिलियन डॉलर है जो कि फ्रांस की कुल जीडीपी का 2.1 फीसदी है।
रक्षा बजट पर खर्च के मामले में जापान दुनिया में 8वें स्थान पर है। जापान का कुल रक्षा बजट 43.6 बिलियन डॉलर है जो कि जापान की कुल जीडीपी का 1.4 फीसदी है।
जर्मनी रक्षा खर्च के मामले में दुनिया में 9वें स्थान पर है। जर्मनी का कुल रक्षा बजट 39.4 बिलियन डॉलर है जो कि जर्मनी की जीडीपी का 1.2 फीसदी है।
युद्ध के मुहाने पर खड़ा दक्षिण कोरिया रक्षा बजट पर खर्च के मामले में 10वें स्थान पर आता है। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच लगातार युद्ध की स्थिति बनी रहती है। दक्षिण कोरिया की सुरक्षा का ज्यादातर भार अमेरिका के हिस्से में है, खासकर कि अमेरिकी युद्धपोत हर वक्त दक्षिण कोरिया की समुद्री सीमा में तैनात रहते हैं।
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