आर्थिक सर्वे पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने तमाम बिंदुओं पर अपनी राय रखी। उन्होंने भारत और चीन के बीच होने वाली बेमेल तुलना पर सवाल उठाए साथ ही नोटबंदी के बाद उससे होने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी अपनी राय रखी।

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नोटबंदी का असर कम हो रहा है

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि नोटबंदी का असर लंब समय तक नहीं रहेगा वहीं उन्होंने इस बात से भी इंकार किया है कि नोटबंदी से कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आर्थिक सलाहकार ने कहा कि 2017-18 में विकासदर 6.75 से लेकर 7.5 फीसदी तक रह सकती है।

भारत और चीन की तुलना गलत

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भारत और चीन की तुलना पर कहा कि तमाम रेटिंग एजेंसी भारत को कम आंकती हैं, सही नहीं हैं। ऐसी तमाम रेटिंग एजेंसी हैं जिनका स्तर खराब है। वहीं उन्होंने भारत और चीन की तुलना को गलत माना है। सुब्रमण्यम ने कहा कि ग्रोथ और क्रेडिट ग्रोथ पर चीन को ऊपर रखा गया है जबकी भारत को 6 स्थान नीचे रखा। उन्होंने कहा कि चीन की आर्थिक हालत बेहद खराब है, हमें ऐसी रेटिंग एजेंसियों पर सवाल उठाने चाहिए।

नोटबंदी के दूरगामी परिणाम होंगे

आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने नोटबंदी को लागू करने के तरीके पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होने कहा कि नोटबंदी की वजह से कुछ समय के लिए लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है पर इसके दूरगामी परिणाम निकलेंगे।

डिजिटल पेमेंट से GDP को गति मिलेगी

डिजिटल लेन-देन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इससे कैश डिपाजिट कम होगा और कालाधन भी घटेगा। साथ ही इस तरह के ट्रांजेक्शन से जीडीपी में को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस विषय में ज्यादा विस्तार से नफा-नुकसान नहीं जोड़ सकते क्योंकि ये इतिहास में पहले बार हुआ है इसकी तुलना नहीं कर सकते।

नोटबंदी का कृषि पर कोई प्रभाव नहीं

अरविंद सुब्रमण्यम ने कृषि पर बोलते हुए कहा कि गेहूं और रबी की फसल पर कोई नोटबंदी का प्रभाव नहीं हुआ है और ना ही किसी फसल की बुवाई पर नोटबंदी का असर हुआ है, उन्होंने आगे जोड़ा कि बैंक क्रेडिट नीचे गिरा रुरल क्रेडिट भी कम हुआ साथ ही रियल स्टेट के दाम भी गिरे।

राज्यों को और तेज गति से काम करने की जरूरत

अरविंद सुब्रमण्यम ने आगे कहा कि राज्यों में अभी भी मूल-भूत सुविधाओं की कमी है। राज्य अपने स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में पीछे हैं। राज्यों को वो तेजी लानी होगी जिससे वह विकास कर सकें।