8 नवंबर 2016 को नोटबंदी ऐलान के बाद से तमाम तरह के किन्तु और परन्तु का सामना कर रही मोदी सरकार ने विश्व की टॉप रेटिंग एजेंसियों में से एक मूडीज से भारत की रेटिंग बढ़वाने के लिए कोशिश की लेकिन मूडीज ने ऐसा कोई भी बदलाव करने से इंकार दिया। रेटिंग एजेंसी ने हवाला दिया कि भारत के कर्ज स्‍तर और बैंकों की कमजोर स्थिति को देखते हुए रेटिंग नहीं बढ़ाई जा सकती।

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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कई दस्‍तावेजों की समीक्षा के बाद यह खबर दी है। यदि पीएम मोदी मूडीज से बेहतर रेटिंग हासिल करने में कामयाब हो जाते तो इससे देश में विदेशी निवेश बुलाने की कोशिशों को मदद मिलती। भारत सरकार का दावा है कि वह दुनिया में सबसे तेज गति बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. ऐसे में मूडीज रेटिंग में सुधार सरकार की कोशिशों को बल देती।

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रॉयटर्स की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने 2014 में जब से देश की कमान संभाली है तब से उन्होंने निवेश बढ़ाने, मुद्रास्फीति को काबू में करने और वित्तीय घाटे को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन उनकी नीतियों को लेकर विश्व की तीन सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से किसी ने भी रेटिंग को अपग्रेड करने का कदम नहीं उठाया।

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मूडीज और वित्त मंत्रालय के बीच संवाद के हवाले से बताया कि मोदी सरकार एजेंसी की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रही। मूडीज एजेंसी को भारत पर चढ़े कर्ज को लेकर संदेह हैं, इसके साथ ही भारतीय बैंकों के 136 बिलियन डॉलर यानी 13600 करोड़ रुपए डूबने से बचाने को लेकर भारत के पास क्या रणनीति है, इस पर भी एजेंसी की चिंता कायम है।

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वित्त मंत्रालय और मूडीज के बीच कई बार संवाद हुए। अक्‍टूबर में संवाद के आदान-प्रदान के जरिए मूडीज की रेटिंग तय करने की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। इनमें कहा गया था कि हालिया सालों में भारत के कर्ज स्‍तर में नियमित तौर पर कमी आई है मगर इस पर मूडीज ने रेटिंग तय करते वक्त ध्‍यान नहीं दिया है।

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बता दें कि पिछले दिनों मूडीज ने भारत की दीर्घकालिक सॉवरिन रेटिंग में कोई बदलाव नहीं किया था। वहीं, भारत फिलहाल नोटबंदी के बाद लोगों को नकदी उपलब्ध कराने की समस्या से जूझ रहा है। मूडीज ने कहा था कि उसने भारत की रेटिंग नहीं बढ़ाई है और स्थिर रखा है। इससे पहले रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भी भारत की रेटिंग अपग्रेड नहीं की थी। मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने एक बयान जारी कर कहा था, 'हालांकि पिछली रेटिंग से अब तक काफी प्रगति हुई है. मूडीज का निष्कर्ष यह है कि भारतीय संस्थानों को मजबूती प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।'