राफेल लड़ाकू विमान डील के बाद अब भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध अब और गहरे होते चले जा रहे हैं। राफेल विमान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन ने भारती कंपनी रिलायंस के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर शुरू करेगी। हाल ही में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर प्लेन खरीदने के सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। फ्रांस भारत को जल्द ही इन लड़ाकू विमानों की खेप भारत को सौंप देगा।

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बनाया जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने अब इस बात की घोषणा कर दी है। रिलायंस समूह के सर्वेसर्वा अनिल अंबानी करीब 22,000 करोड़ रुपए के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करेंगे। जॉइंट वेंचर के जरिए दोनों कंपनी मिलकर रक्षा उत्पाद बनाएंगी।

हाल ही में फ्रांस के साथ हुआ है सौदा

हाल ही में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर प्लेन खरीदने के सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। फ्रांस भारत को जल्द ही इन लड़ाकू विमानों की खेप भारत को सौंप देगा। फाइटर जेट का ये सौदा 59,000 करोड़ रुपए का है। इस सौदे के मुताबिक भारत को तैयार हालत में 36 लड़ाकू राफेल जेट 36 महीने से पहले ही मिल जाएंगे।

क्या होता है ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट

अनिल अंबानी के अधीन कंपनी रिलायंस ने फ्रांस की कंपनी दासो से जॉइंट वेंचर का सौदा किया है। इसके तहत दोनों देशों के बीच ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट के तहत कंपनी को सौदे की राशि का कुछ प्रतिशत निवेश करना होता है। इस सौदे में रिलायंस ने 50 फीसदी ऑफसेट निवेश किया है।

तकनीक हस्तांतरण भी शामिल

ऑफसेट का मुख्य बिंदु यह है कि इस कारोबार में 74 फीसदी आयात भारत के जरिए होगा। जिसका सीधा मतलब है कि इसके जरिए 22,000 करोड़ा का कारोबार होगा। इस जॉइंट वेंचर में तकनीक हस्तांतरण भी शामिल है। इस पूरे मामले पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि डीआरडीओ के साथ भी बाच-चीत चल रही है। इस सौदे में फ्रांस की कंपनी दासो के अलावा एमबीडीओ और थेल्स कंपनी शामिल हैं।