राजकोषीय घाटा यानी सरकार द्वारा शुद्ध रूप से बाजार से लिया गया कर्ज पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी के 5.9 प्रतिशत तक पहुंच गया था जबकि लक्ष्य इसे 4.6 प्रतिशत रखने का था। इस इस साल इसे 5.1 प्रतिशत रखने का लक्ष्य है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मध्य तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में बदलाव न किए जाने के बाद कल सेंसेक्स 244 अंक लुढ़का था।
कल की गिरावट के बाद आज सेंसेक्स 153.97 अंक या 0.92 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,859.80 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 39.60 अंक या 0.78 फीसद की बढ़त के साथ 5,103.85 अंक पर पहुंच गया। एफएमसीजी तथा स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त देखने को मिली। हालांकि, सेंसेक्स की शुरुआत कमजोर रही।
जी-20 देशों के सातवें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही अर्थव्यवस्था 8 से 9 फीसद की वृद्धि की रफ्तार को फिर पकड़ेगी। ब्रोकरों ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस बयान से बाजार की धारणा को बल मिला।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के इस बयान कि सरकार विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है, से भी बाजार की धारणा को बल मिला। विभिन्न वर्गों के सूचकांकों में तेल एवं गैस में सबसे ज्यादा 2.14 फीसद की बढ़त दर्ज हुई। रिलायंस के शेयर में 2.58 प्रतिशत तथा ओएनजीसी में 1.67 प्रतिशत का उछाल आया।
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