8 नवंबर, 2016 को देश में बड़ा बदलाव हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐलान किया था कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए जाएंगे. जिसके बाद देश में जल्द ही 500 और 1000 के नए नोट इंट्रोड्यूस किए गए थे. इसके साथ ही सरकार 2000 रुपये का नया नोट भी लाई थी. लेकिन 2023 को सरकार ने इसे बंद करने का एलान किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने 2000 रुपये के नोट को बंद करने के पीछे बड़ा कारण बताया है.

Advertisement

2000 रुपये के नोट को क्यों किया बंद

Advertisement

देश के वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने बताया कि सरकार के अनुमान के अनुसार 2026 तक 500 और 1000 रुपये के नोट 86.4 फीसदी तक पहुंचने वाला था. इसलिए सरकार ने 2000 रुपये का नोट शुरू किया था. लेकिन जैसे ही सरकार का 2000 रुपये के नोट को इंट्रोड्यूस करने का उद्देश्य पूरा हुआ. सरकार ने इस नोट को वापस लेने का एलान कर दिया.

Advertisement

लेकिन सरकार के अनुसार अभी तक 2000 रुपये के सभी नोट वापस नहीं दिए गए है. इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार 2.08 फीसदी नोट अभी तक बैंक में वापस नहीं लौटाए गए है.

ये भी पता चला है कि 2000 नोटों का इस्तेमाल कम ही किया जा रहा था.

2000 रुपये के नोट बनाने में कितना खर्च होता है?

Advertisement

2000 रुपये का एक नोट बनाने में 3.54 रुपये खर्च होते थे. सरकार को 1000 नोट छापने में 3540 रुपये लग जाते थे. इस तरह 370.2 करोड़ नोटों को छापने में 1310.50 करोड़ रुपये खर्च होते थे.

इसके अलवा वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने बताया कि 19 मई 2023 को 2000 रुपये नोटों को वापस लेने का एलान किया गया. उस समय लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये बैंकनोट्स सर्कुलेशन में मौजूद थे. इसके बाद 30 जून, 2024 तक 3.48 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं.

Advertisement

2000 रुपये नोट की उम्र 7 साल से भी कम रही है.