नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सरकार ने स्वीकार की है। इस गड़बड़ी में 20 लाख से ज्यादा और अपात्र लोग शामिल हैं। इन लोगों ने मिलकर करीब 1364 करोड़ रुपये का गोलमाल किया है। इस बात की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में दी है। पीएम किसान योजना के तहत हर जरूरतमंद किसान को सरकार को साल में तीन किस्तों में 6000 रुपये देती है।

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ये है आरटीआई का जवाब

कृषि मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में बताया है कि अयोग्य लाभार्थियों की 2 श्रेणियों की पहचान हुई है। इनमें से पहली श्रेणी वह है जिसमें अर्हता पूरी नहीं करने वाले या अयोग्य किसान हैं। वहीं दूसरी कैटेगरी है जिसमें आयकर भरने वाले किसानों शामिल हैं। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव से संबद्ध आरटीआई आवेदक वेंकटेश नायक ने यह आरटीआई लगाई थी, जिसके जवाब में सरकार ने यह आंकड़े दिए हैं। इस जानकारी के अनुसार करीब 55.58 फीसदी ऐसे लोगों ने पीएम किसान योजना का पैसा लिया है, जो अयोग्य लाभार्थियों के कैटेगरी की श्रेणी में आते हैं। वहीं करीब 44.41 फीसदी ऐसे लोग हैं जो पीएम किसान योजना की अर्हता पूरी नहीं करते हैं, लेकिन पैसा लिया है। 

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पीएम किसान के पैसे की जा रही है वसूली

इस आरटीआई में बताया गया है कि अयोग्य लाभार्थियों को भुगतान की गई राशि वसूलने का काम शुरू कर दिया गया है। इस आरटीआई से पता चला है कि पीएम किसान योजना के तहत जुलाई 2020 तक अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। आरटीआई के उत्तर से पता चल रहा है कि यह 1364 करोड़ रुपये की धनराशि गलत लोगों के हाथों में गई है। इस जानकारी के अनुसार 49.25 लाख आयकर देने वाले किसानों ने गलत तरीके से पैसा लिया है। वहीं अर्हता पूरी नहीं करने वाले 18.95 लाख किसानों ने भी पैसा लिया है।

5 राज्य में हुई है सबसे ज्यादा गड़बड़ी

आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि 5 राज्यों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हुई है। ये राज्य पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश हैं। 

पंजाब इस बेइमानी में टॉप पर है, जहां अयोग्य लाभार्थियों में से 23.6 फीसदी (यानी 4.74 लाख) लोगों ने गलत तरीके से पैसा लिया है।
इसके बाद 16.8 फीसदी (3.45 लाख लाभार्थी) अयोग्य लाभार्थियों के साथ असम का नंबर है। यहां पर अयोग्य लाभार्थियों में से 13.99 फीसदी (2.86 लाख लाभार्थी) लोगों ने गलत तरीके से पैसा लिया है।