1992 Tax Slab : हाल ही में नयी टैक्स रेजीम में बदलाव किए गए। ये बदलाव किए गए बजट के दौरान। अब 3 लाख रुपये से लेकर 6 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी, 6 लाख रुपये से लेकर 9 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी और 9 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये की आय पर 15 फीसदी टैक्स लगेगा। इसी तरह 12 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा। 15 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा। पर क्या आप क्या जानते हैं कि 1992 में टैक्स स्लैब क्या थी? आगे जानिए तब कितनी इनकम पर टैक्स लगता था।
हाल ही में 1992 की टैक्स स्लैब की एक फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। उसमें उस समय की टैक्स स्लैब बताई गयी है। तब केवल 28000 रु तक की इनकम टैक्स फ्री। 28001 रु की सालाना आय पर भी लोग टैक्स लायबल हो जाते थे। आजकल लोगों को इनकम लाख-लाख रु महीना होना आम बात है। उस लिहाज से देखा जाए तो 28000 रु एक हफ्ते में ही कमा लेते हैं। जबकि 1992 में इतनी आय साल भर की भी हो तो टैक्स फ्री रहती थी।
1992 की टैक्स स्लैब के अनुसार 28000 रु तक की इनकम टैक्स फ्री थी, जबकि 28001 रु से 50000 रु तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लगता था। इसी तरह 50 हजार 1 रु से 1 लाख रु तक की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता था। जो लोग 1 लाख रु से अधिक कमाएं उन्हें 40 फीसदी टैक्स देना होता था।
बजट में वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब नये टैक्स रेजीम में 7 लाख रु तक की इनकम टैक्स फ्री रहेगी। पर यदि इनकम 7 लाख रु से 1 रु भी अधिक हो तो 25000 रु का टैक्स लगेगा। आप सोचेंगे कि 3 से 6 लाख रु तक की इनकम पर टैक्स लग रहा है तो 7 लाख रु तक की आय टैक्स फ्री कैसे हो सकती है। इसलिए जान लीजिए कि ये छूट केवल तब ही मिलेगी, जब किसी की इनकम 7 लाख रु से 1 रु भी ज्यादा हो। एक और सवाल जो आपके मन में आ सकता है कि भला 1 रु से 25000 रु का टैक्स क्यों और कैसे लगेगा। इसका जवाब ये है कि 3 लाख रु तक की आय रहेगी टैक्स फ्री। पर 3 लाख रुपये से लेकर 6 लाख रु तक की आय पर 5 फीसदी के हिसाब से 15000 रु इनकम टैक्स होगा। 6 लाख रुपये लेकर 7 लाख रु यानी इस 1 लाख रुपये की आय पर 10 फीसदी के हिसाब से 10,000 रुपये का आयकर बनेगा। ऐसे में 7 लाख रुपये से अगर 1 रुपये भी आमदनी बढ़ी तो 25,000 रुपये टैक्स देना होगा।
बजट के अनुसार पुरानी टैक्स रेजीम के तहत कोई नयी आयकर छूट नहीं दी गयी। ऐसे में यदि आपकी 15 लाख रुपये की कमाई हो तो कई तरह के निवेश पर टैक्स की छूट ली जा सकती है।
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