नई दिल्ली: रोजगार के मसले पर देशभर में काफी बवाल मचता रहता है। इतना ही नहीं कई बार तो यह भी देखा गया है कि सरकार और विपक्षी दल बेरोजगारी के मसले पर एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं। देखा जाए तो सच यह भी है कि मौजूदा सरकार के सामने बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती या यूं कहें कि बड़ी समस्या है और इस वजह से विपक्ष का रुख हमलावर रहता है। लेकिन इन सब के बीच बेरोजगारी पर सरकार को कुछ राहत देने वाली खबर आई है। जी हां कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की रिपोर्ट सरकार के लिए थोड़ी राहत लेकर आई है। बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, संगठित क्षेत्र में इस साल सितंबर महीने में करीब 12.23 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। वहीं राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में ईएसआईसी के पास कुल 1.49 करोड़ नए अंशधारक रजिस्टर्ड हुए हैं।
2017 से सितंबर 2019 के दौरान 3.10 करोड़ नए अंशधारक ईएसआईसी से जुड़े
जबकि ईएसआईसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2017 से सितंबर 2019 के दौरान 3.10 करोड़ नए अंशधारक इस योजना से जुड़े। एनएसओ की रिपोर्ट विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े नए अंशधारकों की सूची पर आधारित है। ये योजनाएं ईएसआईसी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा संचालित हैं। तीन निकायों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने वाले नए अंशधारकों का आंकड़ा अप्रैल 2018 से जारी किया जा रहा है जिसमें सितंबर 2017 से आंकड़े को लिया गया है।
सितंबर महीने में 9.98 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए
वहीं रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से सितंबर महीने में 9.98 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए जो इसी साल अगस्त में 9.41 लाख थे। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान शुद्ध रूप से 61.12 लाख नए अंशधारक ईपीएफओ की योजनाओं से जुड़े। इसी प्रकार सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच शुद्ध रूप से 15.52 लाख लोग जुड़े।
करीब 2.85 करोड़ नए अंशधारक ईपीएफ योजना से जुड़े
जबकि आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2017 से सितंबर 2019 के दौरान करीब 2.85 करोड़ नए अंशधारक ईपीएफ योजना से जुड़े। रिपोर्ट के अनुसार चूंकि अंशधारकों की संख्या विभिन्न स्रोतों से लिए गए हैं, इसलिए इसमें दोहराव की गुंजाइश है और अनुमान को जोड़ा नहीं जा सकता। एनएसओ ने कहा कि मौजूदा रिपोर्ट संगठित क्षेत्र में रोजगार के बारे में विभिन्न परिदृश्य को बताती है और समग्र रूप से रोजगार का आकलन नहीं करती।
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