नयी दिल्ली। लोन मोरेटोरियम यानी आरबीआई की तरफ से दी गई लोन ईएमआई पर मोहलत खत्म हो चुकी है। इससे आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों के सामने भी पुनर्भुगतान की चुनौती सामने आ गई है। जिस सेक्टर के सामने चुनौती बड़ी है वो है एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग)। एमएसएमई, जो कि कोरोना संकट के पहले से ही आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहा है, सेक्टर में 4 करोड़ फर्म्स ऐसी हैं जिनके सामने वित्तीय मुसीबत आ गई है। ट्रेड और ट्रांसपोर्ट के अलावा बाकी सेवा क्षेत्रों की फर्म्स अधिक संकट में हैं। असल में लॉकडाउन से ही सेवा क्षेत्र ठप्प है। इन फर्म्स के सामने कारोबार ठप्प पड़े रहने के कारण लोन चुकाना बहुत मुश्किल होगा। आने वाली स्थिति को देखते हुए बैंकों के एनपीए बढ़ने के संकेत दिए जा चुके हैं।

Advertisement

कितनी एमएसएमई पर है संकट
एमएसएमई मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस समय देश में 6.33 करोड़ एमएसएमई फर्म्स हैं। इन 6.33 करोड़ में से करीब 4.3 करोड़ से अधिक ट्रेड और दूसरे सर्विस सेक्टरों से ताल्लुक रखती हैं। एमएसएमई सेक्टर के संगठन लोन मोरेटोरियम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सरकार से 6 महीनों का और समय मांगा गया है। मगर बैंकों की तरफ से फर्म्स को लोन चुकाने के लिए मैसेज भेजे जा रहे हैं।

Advertisement

जीडीपी आंकड़ों से सर्विस सेक्टर का संकट जाहिर
वे एमएसएमई जो सर्विस सेक्टर से जुड़ी हुई हैं उनकी खस्ता हालत का पता कल घोषित किए गए जीडीपी आंकड़ों से भी चलता है। सामने आए आंकड़ों से साफ जाहिर है कि होटल, ट्रेड और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टरों के जीवीए में 47 फीसदी की भारी भरकम गिरावट आई है। सेवा क्षेत्र के कारोबारियों के अनुसार उनका व्यवसाय कोरोने से पहले लेवल पर नहीं पहुंचने तक वे इस स्थिति में नहीं होंगे कि लोन या फिर ब्याज अदा कर सकें। एक समस्या ये भी है कि अभी बहुत सी फर्म्स को कारोबार के लिए फंडिंग की जरूरत है। ऐसे में जिन्हें पहले से जरूरत है वे किसी भी तरह पिछला लोन अदा करने की स्थिति में नहीं होंगी।

Advertisement