Success Story : कोविड आने के बाद बहुत से लोगों के सामने रोजगार की दिक्कत आई। मगर इसी सख्त समय में बहुत से लोगों ने अपनी मेहनत से अपनी किस्मत चमका ली। ऐसे ही लोगों में शामिल रहीं मुंबई की कमलजीत कौर। 51 वर्षीय कमलजीत ने अपने एक छोटे से बिजनेस से कामयाबी हासिल की। उन्होंने कैसे एक वेंचर शुरू किया और कैसे उनकी इनकम लाखों में पहुंची ये हम आगे जानेंगे।
कमलजीत ने दिसंबर 2020 में अपने स्पेशल वेंचर की शुरुआत की। तीन महीने से अधिक समय तक मार्केट रिसर्च करने के बाद कमलजीत ने दिसंबर 2020 में कोरोना काल में किम्मूज किचन की शुरुआत की। यह नया बिजनेस फार्म-फ्रेश घी से जुड़ा हुआ था, जो हानिकारक एडिटिव्स, प्रीजर्वेटिव्स और हर तरह के केमिकल से फ्री है। इसे क्लासिक बिलोना तकनीक का उपयोग करके तैयार किया जाता है। ये दूध आता है लुधियाना में कमलजीत के गांव से।
सप्लाई की कमी नहीं
कृषि जागरण की रिपोर्ट के अनुसार कमलजीत ने बिजनेस शुरू करने के बाद शुरुआती हफ्तों में पहले स्थानीय मुंब्रा (ठाणे से सटा उपनगर) विक्रेताओं से दूध खरीदा। लेकिन उस दूध में एक कमी थी। मगर कमलजीत को वहां का दूध उतना परफेक्ट नहीं लगा, जितना अपने गांव का दूध लगता था। कमलजीत लुधियाना के अपने गांव से दूध मंगाने के तरीके खोजने लगीं। साथ ही वे चाहती थीं कि उसका टेस्ट न बदले और न ही क्वालिटी।
कमलजीत कहती हैं कि उन्होंने कभी भी स्टोर से खरीदा हुआ घी यूज नहीं किया। बल्कि घी हमेशा उनके घर पर ताजा बनाया जाता था। इसीलिए वे मुंबई को उस घी के स्वाद से परिचित कराना चाहती थीं। वैसे तो घी बनाने के कई तरीके हैं। पर कनलजीत और उनका परिवार एक खास तकनीक से घी बनाता था। ये है बिलोना नामक तकनीक। ये तकनीक बेहद खास है, जिसमें, सीधे मक्खन या दूध के बजाय दही से घी बनाना जाता है। वहीं बाजार में बिकने वाला घी मक्खन या क्रीम से बनाया जाता है।
इस तकनीक में गाय के दूध को उबालकर ठंडा किया जाता है। दूध में एक बड़ा चम्मच दही मिलाया जाता है। रात भर के लिए कमरे में छोड़ दिया जाता है। इसके बाद मक्खन को निकालने के लिए दही को मथा जाता है। आखिर में मक्खन को उबाल कर पानी अलग कर दिया जाता है। फिर अंत में केवल शुद्ध घी शेष रह जाता है।
आज के समय में किम्मूज किचम हर महीने 4,500 से अधिक बोतल घी बेचता है। इससे 20 लाख रुपये अधिक की मासिक बिक्री होती है। कमलजीत के मुताबिक कमाए गए पैसों का एक प्रतिशत गुरुद्वारों में पूजा करने वालों को भोजन कराने जैसी सेवाओं पर खर्च किया जाता है। उनके बेटे हरप्रीत के मुताबिक अभी केवल भारत में ही निर्यात किया जा रहा था। पर अब उन्हें विदेशों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। उनके रिटेल घी की बोतलें तीन अलग-अलग साइज में आती हैं। इनमें 220 मिली, 500 मिली और 1 लीटर शामिल हैं।
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