नयी दिल्ली। सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में काफी कुछ रखा है। बहुत से छोटे व्यवसाय और स्टार्ट-अप्स खुद को एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) की कैटेगरी में रजिस्टर करवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। मगर अधिकारियों का कहना है कि इनमें से अधिकतर सरकार के आर्थिक राहत पैकेज का फायदा लेने योग्य नहीं है। सरकार ने पिछले महीने करीब 45 लाख एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के लोन की घोषणा की थी जो पिछले साल से लिक्विडिटी की कमी का सामना कर रहे हैं। दरअसल ये टर्म लोन, जो गारंटी-मुक्त और ऑटोमैटिक हैं, 31 अक्टूबर तक उपलब्ध कराए गए हैं, मगर इनका बेनेफिट सिर्फ उन्हीं व्यवसायों को मिलेगा जिन पर 25 करोड़ रुपये से अधिक का लोन बकाया हो।
सरकार की तरफ से एमएसएमई के लिए लोन और कई अन्य बेनेफिट घोषित किए जाने के बाद देश भर के स्टार्ट-अप्स और छोटे व्यवसाय काफी तेजी से एमएसएमई मंत्रालय के पंजीकरण पोर्टल, उद्योग आधार, पर खुद को एमएसएमई रजिस्टर करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। लोन के जरिए लिक्विडिटी हासिल करने के साथ-साथ बाकी बेनेफिट प्राप्त करने के लिए स्टार्ट-अप्स और छोटे व्यवसाय ऐसा कर रहे हैं। मगर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन मिलना थोड़ा मुश्किल है। इस नए लोन को 'एडिशनल वर्किंग कैपिटल फाइनेंस' की कैटेगरी में रखा गया है, जो उन फर्म्स के लिए है जिन्हें से पहले लोन मिल चुका है और उनका टर्नओवर 100 करोड़ रु तक है।
एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक फरवरी के अंत तक फर्म पर जितना क्रेडिट बकाया होगा उसका अधिकतम 20 फीसदी लोन दिया जाएगा। इसके साथ ही बकाया लोन उस तारीख से कम से कम 60 दिनों पहले का होना चाहिए। अधिकारी के मुताबिक लोन के मामले में जबरदस्त रेस्पोंस देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस लोन पर फर्म की कोई भी अपनी गारंटी नहीं होगी। बल्कि इस लोन पर 100 फीसदी गारंटी सरकारी की तरफ से दी जाएगी। हालांकि वर्तमान एनपीए नियमों के तहत वो एमएसएमई पुनर्गठन के योग्य नहीं है, जिसे तनावग्रस्त वर्गीकृत किया गया है। बैंक ऐसे एमएसएमई के प्रमोटरों की फर्म में मौजूदा हिस्सेदारी के 15 प्रतिशत (अधिकतम 75 लाख रु) के बराबर लोन दे सकता है।
एमएसएमई में रजिस्टर हो रहे नए छोटे कारोबार और व्यवसायों को लोन के लिए सख्त नियमों को सामना करना है। मगर इन्हें एक बेनेफिट मिल सकता है। केंद्र ने एमएसएमई की क्षमता का विस्तार करने और उनमें से चुनी हुई फर्म्स को लिस्ट होने में मदद करने के लिए 50,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स बनाने का ऐलान किया है। सरकार लिस्ट होने वाली एमएसएमई में 15 प्रतिशत तक की इक्विटी हिस्सेदारी खरीदेगी। वैसे एमएसएमई को सरकार ने 3 लाख करो़ड़ के बिना गारंटी लोन देने का ऐलान किया था। इससे 45 लाख फर्म्स को फायदा मिलेगा। एमएसएमई को कई सहूलियतों के साथ 3 लाख करोड़ रु का लोन मिलेगा। संकट में चल रही फर्म्स को 20 हजार करोड़ के अतिरिक्त लोन का ऐलान किया गया था।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान