नयी दिल्ली। कोरोना महामारी ने जिन सेक्टरों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है उनमें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) भी शामिल है। एमएसएमई सेक्टर में बड़ी संख्या में रोजगार का भी नुकसान हुआ है। मगर अब यूपी सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को रोजगार के अवसर बनाने के लिए भारतीय उद्योग संघ (आईआईए) के साथ एक समझौता किया है। ये रोजगार के अवसर उन 3 लाख प्रवासी मजदूरों के लिए होंगे जो कोरोना लॉकडाउन के दौरान राज्य में लौटे हैं। इसी तरह सरकार ने लघु उद्योग भारती के साथ 1.5 लाख नौकरियों के लिए समझौता किया है। आईआईए ने लगभग 5,000 श्रमिकों को रोजगार देने की पुष्टि की है, जबकि अन्य 5,000 को भी विभिन्न उद्योगों द्वारा रोजगार देने की प्रोसेस चल रही है। वहीं लघु उद्योग भारती का कहना है कि इसने 15,000 श्रमिकों को काम दिलाने में मदद की है।
मजदूर वर्ग के लिए भी रोजगार के ढेरों अवसर हैं। आईआईए के कार्यकारी निदेशक डीएस वर्मा के मुताबिक 250 से अधिक कंपनियों ने मजदूरों की मांग रखी है और हम उनकी मांग को पूरा कर रहे हैं। जबकि कई एमएसएमई फर्म्स ने लॉकडाउन के बाद उत्पादन शुरू नहीं किया है, मगर जितना काम शुरू हुआ है उसके आधार पर जानकार रोजगार के अवसरों को संतोषजनक मान रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि 3 लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा करने में एक साल से अधिक का समय लगेगा लेकिन यह एक लक्ष्य है।
यूपी में 8,28,708 प्रवासी मजदूरों की डिटेल का उपयोग करके एक ऑनलाइन डेटा बैंक बनाया है, जो यूपी सरकार के एमएसएमई विभाग की तरफ से दिया गया था। आईआईए के 8,000 से अधिक सदस्यों के पास ये डेटा है और वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सीधे प्रवासी श्रमिकों से संपर्क कर रहे हैं। करीब 30 लाख प्रवासी मजदूरों की एक सूची तब तैयार की गई थी जब वे लॉकडाउन के दौरान यूपी लौटे थे। इनमें लगभग 20 लाख अकुशल श्रमिक थे। बाकी के पास अच्छा स्किल है। जो लोग लौटे हैं उनके पास हॉस्पिटेलिटी, निर्माण, चित्रकला, कार्पेंटर, सिलाई, कृषि और यहां तक कि रत्नों और आभूषणों में विशेषज्ञता है।
लगु उद्योग भारती के एक अधिकारी के अनुसार जून से जुलाई के बीच 15,000 प्रवासी श्रमिकों को रखने में मदद की गई। उनका कहना है कि संगठन एक साल के अंदर 1.5 लाख नौकरियों के अपने लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद करता है। उन्होंने बताया कि समस्या यह है कि बहुत सारी इकाइयों ने अनलॉक के बाद काम शुरू नहीं किया है। इस समय तक 15,000 प्लेसमेंट हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 30% अकुशल हैं और 70% कुशल लोग हैं।
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