नयी दिल्ली। सरकार ने पिछले महीने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की लोन फैसिलिटी का ऐलान किया था। हालांकि बैंकों में लंबी कागजी कार्रवाही जैसे कारणों के चलते छोटे कारोबारियों को लोन मिलने में काफी दिक्कत आने की खबरें सामने आईं। अब यह स्वीकार करते हुए कि वरिष्ठ बैंक अधिकारियों द्वारा तैयार लोन देने की नीतियों और ब्रांच स्तर पर उसे लागू करने में गड़बड़ी है सरकारी बैंक व्यापारियों की सहायता कर रहे हैं ताकि उन्हें आसानी से लोन मिल सके। इससे सरकार के एमएसएमई लोन कार्यक्रम को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी।
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर चल्ला श्रीनिवासुलु सेटी के मुताबिक जून में पूरे भारत में 80 सहायक महाप्रबंधकों की नियुक्ति की गई जो अब एमएसएमई के लिए बैंक के साथ संपर्क का माध्यम होंगे। यानी ये स्पेशल अधिकारी बैंक और फर्म के बीच पुल का काम करेंगे। उनके अनुसार बैंक के सीनियर मैनेजमेंट और ब्रांचों के बीच एक अलगाव रहा है। ऑपरेटिंग स्तर पर कोरोना से संबंधित चुनौतियों से पहले ही एमएसएमई क्षेत्र में बहुत सारी परेशानियों थीं और अब बैंकों को यह तय करना है कि वे उन्हें लोन दें या नहीं।
सेट्टी के अनुसार कुछ इस तरह की रिपोर्टस सामने आई हैं जिनमें पता चला है कि ग्राहकों को ओवरड्राफ्ट हासिल करने के लिए बैंकों के 30-45 दिन तक चक्कर काटने पड़ते हैं। यही वजह है कि एमएसएमई को लोन देने के मामले में माइक्रोफाइनेंस फाइनेंशियल फर्म्स और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग कंपनियां) की 30-35 फीसदी हिस्सेदारी होती है। सेट्टी कहते हैं कि बैंक एमएसएमई के अधिकतर ग्राहकों का ध्यान नहीं रखते। अब जोनल अधिकारी एमएसएमई के लिए संपर्क का एक सेंटर होंगे। एक्सपर्ट मानते हैं कि सरकारी गारंटी के चलते बैंकों को जल्दी लोन देना चाहिए।
13 मई को केंद्र सरकार ने छोटे व्यापारियों को कोरोना संकट से निपटने में मदद करने के लिए 3 लाख करोड़ की एक आपातकालीन ऋण गारंटी लाइन योजना की घोषणा की थी। हालाँकि अब तक योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा केवल करीब 33,000 करोड़ के लोन पास किए गए हैं, जबकि 59,204 ग्राहकों को 2,030 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है। यानी प्रति एमएसएमई 3.4 लाख रु का लोन दिया गया है। बैंकों ने अब तक एमएसएमई उधारकर्ताओं को पास की गई राशि के आधे से भी कम लोन वितरण किया है। इस बीच अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म गूगल पे पर एमएसएमई सेक्टर के लिए क्रेडिट सुविधा शुरू करेगी। गूगल ये फैसिलिटी भारत के प्रमुख कर्जदाताओं के साथ मिल कर साल के अंत तक शुरू कर सकती है। इससे 30 लाख से अधिक वेरिफाइड कारोबारी अपनी गूगल पे ऐप पर इंस्टेंट क्रेडिट सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
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