नयी दिल्ली। कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में मार्च में लॉकडाउन का ऐलान किया गया था। इससे कारोबार ठप्प हो गए थे, जो अभी तक पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौट पा रहे हैं। लॉकडाउन से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को भी झटका लगा। एमएसएमई की समस्याओं को देखते हुए सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में 3 लाख करोड़ रु फंडिंग का ऐलान किया गया। 1 जून से ये लोन दिया जाना शुरू किया जा चुका है। शुरुआत में कुछ ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं जिनमें कहा गया कि एमएसएमई को लोन मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। मगर एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार कुछ ऐसी भी फर्म्स हैं जिन्हें खाते में लोन का पैसा आ चुका है, मगर वे निकालने को तैयार नहीं हैं।

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क्या है इसकी वजह
ये मामला वाराणसी का है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन पास किए जा चुके हैं। इसमें से 351.95 करोड़ रुपये का लोन बांटा भी जा चुका है। मगर करीब 3,000 ऐसे लोग हैं, जिनके खाते में पैसे आ गये हैं पर वे निकालने को राजी नहीं हैं। इसकी वजह है काम न होना। ऐसे लोगों का कहना है कि जब कारोबार ही नहीं चल रहा है तो वे पैसा कहां लगाएंगे।

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कुछ ने कहा लोन की जरूरत नहीं
सरकार की तरफ से इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के ऐलान के बाद वाराणसी जिले में 18921 उद्यमी और व्यापारी ऐसे पाये गये जो लोन हासिल करने के योग्य और पात्र थे। 10657 लोगों ने बैंकों से पैसा निकाला, मगर 4821 लोगों लोन की जरूरत होने से ही इंकार कर दिया। एमएसएमई फर्म्स को शुरू में यहां भी लोन लेने में कुछ दिक्कतें आईं, मगर अब वे पैसा ही नहीं निकाल रहे। इसकी असल वजह कारोबार न होना है। बाजार में मांग नहीं है।

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लोगों से किया गया संपर्क
सरकार की तरफ से घोषित की गई क्रेडिट स्कीम के तहत सभी पात्र एमएसएमई से फोन और ई-मेल के जरिए कॉन्टैक्ट भी किया गया। लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी दी गई और यहां तक कि लोन लेने के लिए ऑफर पेश किए गए। कुछ लोग तैयार हुए, मगर कुछ लोगों ने लोन लेने से इंकार कर दिया। जिले के प्रमुख बैंक यूनियन बैंक आफ इंडिया ने 2,318 लोगों को 57.03 करोड़ रुपये के लोन पास किए हैं।

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