नयी दिल्ली। कोरोना काल में सरकार ने कई सेक्टरों के लिए जरूरी कदम उठाए। इनमें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) भी शामिल है। आत्मनिर्भर राहत पैकेज में एमएसएमई के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लोन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) का ऐलान किया गया। इस स्कीम के तहत एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रु का लोन दिया जाना था। मगर स्कीम का लाभ लेने के लिए 31 अक्टूबर को डेडलाइन के तौर पर निर्धारित किया गया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि 3 लाख करोड़ रु की क्रेडिट लिमिट या 31 अक्टूबर, जो भी पहले हो, ईसीएलजीएस के तहत एमएसएमई लोन ले सकती हैं। मगर अब सरकार 31 अक्टूबर की डेडलाइन को आगे बढ़ा सकती है।
क्या है प्लान
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ईसीएलजीएस के तहत सॉवरेन-गारंटीड लोन लेने के लिए कारोबारियों के लिए टाइम विंडो का विस्तार करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो इस स्कीम के तहत 31 अक्टूबर के बाद भी एमएसएमई लोन ले सकेंगी। ईसीएलजीएस के तहत 3 लाख करोड़ रु तक के लोन को मंजूरी देने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर थी, जिसे 23 मई को लागू किया गया था। लोन दिया जाना 1 जून से शुरू किया गया।
क्या है समय सीमा बढ़ाने की वजह
1 जून से 10 सितंबर तक इस योजना के तहत 1.63 लाख करोड़ का लोन ही पास किया गया है, जबकि 1.18 लाख करोड़ रु लोन बंटा है। यानी करीब साढ़े 3 महीनों की अवधि में स्कीम की लिमिट के लिहाज से आधे से भी कम पैसा बंटा है। स्कीम की समयावधि खत्म होने में सिर्फ डेढ महीना बाकी है। सरकार की तरफ से योजना की समयसीमा बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है। सरकार इस मामले में समय पर पर स्पष्टीकरण भी जारी कर सकती है।
लोन के आंकड़े
हाल ही में वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में बताया गया है कि सरकारी और प्राइवेट बैंकों से मिली जानकारी के मुताबिक 42,01,576 एमएसएमई फर्म्स को 1,63,226.49 करोड़ रुपये का लोन पास हो चुका है। इसमें से 25,01,999 फर्म्स को 1,18,138.64 करोड़ रुपये का लोन आवंटित हुआ है।
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