नयी दिल्ली। सरकार ने बुधवार को कहा कि मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सरकारी कंपनियों) ने पिछले तीन महीनों के दौरान एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) को 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया अदा किया है। एमएसएमई मंत्रालय ने कहा कि अब छोटे कारोबारियों के बकाए का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा उसी महीने में अदा किया जाएगा। पेंडेंसी (बकाया रखने की अवधि) की अवधि अब 45 दिन के अंडर है। सरकार ने आदेश भी दिया है कि समय पर भुगतान न करने वाले खरीदार फर्म्स को 1 फीसदी मासिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

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मई में हुआ था ऐलान
मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) एमएसएमई को 45 दिनों के भीतर पेमेंट करेंगे। एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार इस घोषणा का सख्ती से पालन किया और केंद्रीय मंत्रालयों, सीपीएसई और राज्य सरकारों के सामने इस मामले को रखा। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्टिंग को आसान, नियमित और सहज बनाने के लिए मासिक भुगतान और पेंडेंसी की रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन फॉर्मेट बनाया गया है।

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नहीं होता समय पर भुगतान
2006 का एमएसएमई विकास अधिनियम यह प्रावधान करता है कि इस तरह के बकाये का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। मगर यह देखा गया है कि वस्तु और सेवाओं वाली एमएसएमई फर्म्स को निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता। सार्वजनिक और निजी कंपनियां इस समय सीमा को पार कर जाती हैं और ये एमएसएमई के लिए मुसीबत का कारण बनता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि जुलाई में नया सिस्टम शुरू होने के बाद से एमएसएमई के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर 4 लाख के करीब पंजीकरण हो चुके हैं।

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75 फीसदी भुगतान
एमएसएमई के लिए कोरोना संकट के बाद दिक्कतें बढ़ी हैं। इनमें एक बड़ी दिक्कत सरकारी विभागों और सरकारी कंपनियों पर रुका हुआ भुगतान भी है। हालांकि अब 75 फीसदी पैसा एमएसएमई को अदा कर दिया गया है। एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एके शर्मा ने हाल ही में इसकी जानकारी दी थी।