नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को कहा कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) उधारकर्ता मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत अपने लोन के पुनर्गठन के लिए पात्र होंगे। लोन पुनर्गठन या रिस्ट्रक्चर के प्रावधान को बढ़ा कर आरबीआई ने लाखों छोटे व्यवसायों के लिए एक खुशखबरी का ऐलान किया है। इस पुनर्गठन को 31 मार्च 2021 तक लागू करना होगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एमएसएमई के लिए पुनर्गठन फ्रेमवर्क, जो डिफ़ॉल्ट रूप से लागू है, पहले से ही मौजूद है। इस स्कीम से बड़ी संख्या में एमएसएमई को फायदा मिला है। कोरोना के कारण सामान्य कामकाज और नकदी प्रवाह बाधित हुआ है, जिससे एमएसएमई सेक्टर में तनाव बढ़ा है। इससे सेक्टर की मदद जरूरी है।

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करना होगा इन शर्तों को पूरा
आरबीआई ने एमएसएमई को अपने लोन का पुनर्गठन करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। 1 मार्च 2020 को उन पर बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) का कुल लोन 25 करोड़ रु से ज्यादा नहीं होना चाहिए। 1 मार्च 2020 को कर्जदार का खाता 'स्टैंडर्ड एसेट' होना चाहिए। पुर्नगठन लागू होने की डेट पर फर्म जीएसटी रजिस्टर्ड होनी चाहिए। हालांकि यह शर्त उन एमएसएमई पर लागू नहीं होगी जो जीएसटी-पंजीकरण से मुक्त हैं।

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नहीं कम हुई रेपो रेट
आज आरबीआई की तीन दिवसीय मोद्रिक नीति समीति की बैठक समाप्त हुई। हर दो महीने में एक बार होने वाली इस बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला किया गया। रेपो रेट 4 फीसदी पर ही बरकरार रहेगी। बाजार जानकार पहले ही रेपो रेट में और अधिक कटौती न किए जाने का अनुमान लगा रहे थे। दास ने कहा कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियां नाजुक बनी हुई हैं। लेकिन वैश्विक वित्तीय बाजारों में उछाल आया है। रेपो रेट के साथ ही रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिवर्स रेपो रेट 3.3 फीसदी पर ही बरकरार रहेगी। आरबीआई गवर्नर ने और भी कई अहम घोषणाएँ की हैं।

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