नयी दिल्ली। अगर आप नौकरी की तलाश में हैं तो ये खबर आपके बहुत काम की है। दरअसल आने वाले कुछ समय में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियों के अवसर जनरेट होंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि केंद्र सरकार केवल एमएसएमई सेक्टरों से 5 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना बना रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गडकरी, जो कि केंद्रीय एमएसएमई मंत्री हैं, ऐसा ही बयान पहले भी दे चुके हैं। पहली बार वर्चुअल 2020 होरासिस एशिया की बैठक को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार केवल एमएसएमई सेक्टर से 5 करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना बना रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले सालों में भारत दुनिया में टॉप ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनेगा।
गडकरी ने कहा कि चीन के मुकाबले भारत के पास अपार संभावनाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की युवा प्रतिभाशाली वर्कफोर्स, कच्चा माल और अनुकूल नीति के चलते भारत निवेशकों के बीच निवेश करने के लिए पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। इस प्रोग्राम में एशिया और दुनिया के 400 सबसे प्रमुख व्यापारिक और राजनीतिक नेताओं ने हिस्सा लिया, जो कोरोना के कारण हुए आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक दिक्कतों को दूर करने में जुटे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास में एमएसएमई योगदान को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ा कर 40 प्रतिशत तक ले जाना है। साथ ही एमएसएमई की निर्यात में भागीदारी भी 48 प्रतिशत से बढ़ा कर 60 प्रतिशत करनी है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले अगस्त में भी गडकरी ने स्वावलंबन ई-समिट 2020 में कहा था कि जीडीपी ग्रोथ रेट में 30 फीसदी आय एमएसएमई सेक्टर से ही प्राप्त होती है। इस सेक्टर से करीब 11 करोड़ लोगों को काम मिला है। गडकरी ने तब कहा था कि इस सेक्टर से आने वाले समय में 5 करोड़ नये रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अगस्त में हुए उस कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि अगले 5 सालों में जीडीपी ग्रोथ रेट में एमएसएमई इनकम को 30 फीसदी से बढ़ा कर 50 फीसदी किए जाने की उम्मीद है। साथ ही निर्यात में इस सेक्टर की भागीदारी बढ़ा कर 60 फीसदी और 5 करोड़ नए रोजगार के अवसर जनरेट किए जाएंगे। एमएसएमई सेक्टर की अहमियत को देखते हुए सरकार ने कोरोना संकट में इस क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रु के बिना गारंटी वाले लोन का ऐलान किया था। ये सरकार के आत्मनिर्भर भारत राहत पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा था।
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