नई दिल्ली, फरवरी 27। ओडिशा में जन्मी चांदनी खंडेलवाल हमेशा प्लास्टिक के उपयोग को लेकर चिंतित रहती थीं, खास कर जब पैकेजिंग की बात आए। इसका एक ही कारण है और वो है पर्यावरण को नुकसान। समय के साथ पर्यावरण के लिए इस चिंता ने उन्हें अपना स्टार्टअप इकोलूप लॉन्च करने का आइडिया दिया। ये स्टार्टअप पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग उत्पादों पर फोकस करता है। चांदनी के अनुसार स्टार्टअप के नाम का 'इको' पर्यावरण के लिए है, और 'लूप' उस आकार को दर्शाता है जो जहां समाप्त होता है वहीं से शुरू होता है। सितंबर 2021 में लॉन्च किए गए इस स्टार्टअप से वे उत्पादों को पूरे भारत में पा रही हैं, जिससे प्रति माह उनकी कमाई 2 लाख रुपये तक है। आगे जानते हैं चांदनी की पूरी कहानी।
जब चांदनी कॉलेज हॉस्टल में थीं, तो उन्हें दोपहर और रात के खाने के लिए ले जाने वाला (कैरी अवे) भोजन मिलता था, जो प्लास्टिक की थैलियों में पैक किया जाता था। इससे वे काफी परेशान रहती थीं। वे सोचतीं कि एक बार जब हम इन्हें फेंक देंगे तो ये प्लास्टिक कहां जाएगी। उन्होंने उन्हें इन प्लास्टिक की थैलियों को धो और सुखा कर अपने ट्रॉली बैग में इकट्ठा करना शुरू कर दिया। फिर उन्हें डंप करने के बजाय उन्होंने इन्हें प्लांटर्स और कुछ घरेलू उपयोगी उत्पादों में बदल दिया।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), भुवनेश्वर से ग्रेजुएट चांदनी के मुताबिक उन्हें हमेशा से आर्ट्स और क्राफ्ट्स में दिलचस्पी रही है। द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार उनकी मां ने उन्हें अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। 10वीं कक्षा के बाद चांदनी स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, बारीपदा में एडमिशन लेने में कामयाब रहीं। फिर वे निफ्ट में शामिल हुईं। इसने उनके लिए बहुत सारे दरवाजे खोले। इसी में यह स्टार्टअप भी शामिल है। निफ्ट के दौरान चांदनी को ओडिशा में कई शिल्प समूहों में भाग लेने का अवसर मिला।
उन्होंने स्थानीय कारीगरों के साथ काम किया और इस दौरान उन्हें क्राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाले कई नेचुरल मैटेरियल (सबाई घास, बांस, ताड़ के पत्ते, मेशी) आदि के बारे में पता चला। इसी दौरान उनके दिमाग में इन चीजों को पैकेजिंग के लिए उपयोग करने का आइडिया आया। उन्होंने सोचा कि थोड़ी जरूरत मशीनीकरण की होगी और थोड़ी कलात्मक तकनीकों की, लेकिन इसे पैकेजिंग का एक स्थायी रूप दिया जा सकता है, जो प्लास्टिक की जगह ले सकता है।
इकोलूप नेचुरल कंटेंट का उपयोग करके गिफ्ट पैकेजिंग तैयार करता है। ये बास्केट्स, ट्रे और बक्से सहित लगभग 20 प्रकार के उत्पाद बनाता है। चांदनी के मुताबिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले स्टायरोफोम बोर्ड्स को बदलने के लिए चावल के भूसे जैसी सामग्री भी तलाश रहे हैं। वे केक और कुकीज जैसे तैयार हुए फूड प्रोडक्ट्स के लिए बक्से बनाने के लिए बांस और पत्तियों का उपयोग कर रहे हैं। उनके साथ अधिकर महिलाएं काम करती हैं, जिन्होंने चांदनी से ही ट्रेनिंग ली।
इकोलूप में चांदनी का शुरुआती निवेश 20,000 रुपये था। अब वे हर महीने लगभग 1-2 लाख रुपये कमा रही हैं। उनके पति भी एक एग्रीटेक स्टार्टअप चलाते हैं। उन्होंने इकोलूप को एक ब्रांड के रूप में डेवलप करने में काफी मदद की। उन्होंने हमेशा अपनी पत्नी को सपोर्ट दिया। आगे वे विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक पत्तों में कच्चे माल को तलाशने के बारे में सोच रही हैं। यानी पैकेजिंग में पत्तों का इस्तेमाल।
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