नयी दिल्ली। बजट 2021 पेश किए जाने में कुछ ही दिन बाकी हैं। बजट से पहले इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने देश में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए लोन पर अधिक ब्याज छूट की मांग की। आईसीसी के अनुसार एमएसएमई के लिए लोन पर ब्याज की छूट ज्यादा होनी चाहिए ताकि रोजगार में बढ़ोतरी हो सके। कोलकाता में मुख्यालय वाले आईसीआई ने बजट से ज्यादा अनुपालन के लिए टैक्स रेट्स को कम करके पर्सनल टैक्सेशन को आसान बनाए जाने को भी कहा है। हालांकि ये सब सरकार पर निर्भर है कि वो ऐसा करे या नहीं।
आईसीसी प्रेसिडेंट विकास अग्रवाल का कहना है कि लोन पर दो प्रतिशत ब्याज सबवेंशन (आर्थिक सहायता) स्कीम ने भारतीय एमएसएमई को सही मायने में सहारा दिया है। हम यह प्रस्ताव देना चाहते हैं कि इस योजना को आगे बढ़ाया जाए। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि पहले के एक करोड़ रुपये के मुकाबले 3 करोड़ रुपये तक के लोन पर 3-4 प्रतिशत ब्याज दर की छूट मिले।
आईसीसी प्रेसिडेंट ने रेसिडेंट करदाताओं के लिए लाभांश कर (डिविडेंड टैक्स) को भी 20 प्रतिशत से घटा कर 15 प्रतिशत किए जाने की वकालत की। उनके अनुसार एमएसएमई के लिए ब्याज सबवेंशन स्कीम का एक प्रमुख एजेंडा उन्हें जीएसटी नेटवर्क में लाना है। नयी छूट से उन्हें इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम के दायरे में आने में मदद मिलेगी।
एमएसएसई को जीएसटी में राहत की भी मांग हो रही है। जानकारों के अनुसार कारोबार ग्रोथ बढ़ाने और एमएसएमई के प्रोत्साहन के लिए व्यावसायिक सेवाओं पर जीएसटी दर को 5 फीसदी तक कम कर देना चाहिए जो अभी 18 फीसदी है। 18 फीसदी जीएसटी का दायरे में इस समय कानूनी पेशेवरों, कोरियर सर्विसेज और मैनेजमेंट कंसल्टिंग के अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, आर्किटेक्ट्स, एचआर, मार्केटिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट तथा होस्टिंग शामिल हैं। इसके अलावा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोविजनिंग, मेंटेनेंस, रिपेयर और इंस्टॉलेशन सर्विसेज भी इसी लिस्ट में शामिल हैं।
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